अहमदाबाद: गुजरात उच्च न्यायालय ने 2002 नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में मौत तक उम्रकैद की सजा काट रहे बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को एक सप्ताह की जमानत मिल गई है. न्यायमूर्ति बी एन करिया ने बजरंगी को अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए अस्थायी राहत दी.

बजरंगी ने अपनी याचिका में कहा है कि उनकी पत्नी अस्पताल में है. उनके गर्भाशय में ट्यूमर है, जिसका जल्द ही ऑपरेशन होगा. बाबू ने अदालत से कहा कि ऐसी स्थिति में उसकी मौजूदगी जरूरी है. साबरमती केंद्रीय कारागार में कैद बजरंगी ने 30 दिनों के लिए जमानत मांगी थी.

एक विशेष अदालत ने नरोदा पाटिया नरसंहार मामले में अगस्त 2012 में बजरंगी को मृत्यु तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस नरसंहार में 97 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादा अल्पसंख्यक समुदाय के थे. इसी अदालत ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को 28 वर्ष की जेल की सजा सुनाई थी.

कई बार मिल चुकी है बेल 

इससे पहले बजरंगी अहमदाबाद स्थित साबरमती जेल से चेन्नै में आंख दिखाने के लिए परोल पर रिहा हुआ था. तीन महीने की बेल मेडिकल ग्राउंड पर बजरंगी को मिली थी. बजंरगी की सेहत पर डॉक्टरों ने कहा था कि वह अपनी आंखों की रोशनी तेजी से खो रहा है. इसी आधार पर गुजरात हाई कोर्ट ने तय समय के लिए बेल दी थी. बजरंगी के वकील अनिल पटेल ने अपने क्लाइंट को मिली लंबी बेल पर कुछ भी कहने के इनकार कर दिया. इतनी लंबी अवधि की बेल को लेकर खूब आलोचना हो रही थी.

इससे पहले भी बाबू बजरंगी को जेल के कई मौकों पर छुट्टी मिली है. कभी भतीजे की शादी पर तो कभी पिता की तबीयत खराब होने पर बजरंगी को छुट्टी मिली है. पिछले कुछ हफ्तों से बाबू बजरंगी मीडिया से बच रहा था और वह अपने घर पर आराम फरमा रहा था. सूत्रों के मुताबिक यहीं पर डॉक्टर बजरंगी की आंख की जांच करने आते थे.

गुजरात दंगों का दोषी है बाबू बजरंगी

गुजरात दंगों के नरोदा पाटिया नरसंहार में राज्य की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी समेत 30 लोगों को कोर्ट ने दोषी ठहराया था. 2002 में दंगों की आग में झुलस रहे गुजरात में नरोदा पाटिया में तीन दिनों तक खूनी खेल चला था. बाबू बजरंगी जिसका वास्तविक नाम बाबूभाई पटेल है को आजीवन कैद की सजा मिली थी.