Bad News For Pakistan India Accelerated Preparations To Build Kwar Dam On Chenab River In Jammu And Kashmir
पाकिस्तान के लिए बुरी खबर, भारत ने जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बांध बनाने के लिए तेज की तैयारी, 4,526 करोड़ होंगे खर्च
Kwar Dam: क्वार बांध से 540 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना जुड़ी हुई है. इसके वित्तपोषण के लिए 3,119 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने हेतु केंद्र सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं.
Kwar Dam on the Chenab River in Kishtwar: सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) को स्थगित करने के बाद भारत पाकिस्तान को एक और बड़ा झटका देने की तैयारी में है. केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर महत्वपूर्ण क्वार बांध के निर्माण में तेजी लाने के लिए वित्तीय संस्थानों और बैंकों से उचित दर पर ऋण मांगा है. क्वार बांध से 540 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना जुड़ी हुई है. इसके वित्तपोषण के लिए 3,119 करोड़ रुपये का ऋण जुटाने हेतु केंद्र सरकार ने कदम आगे बढ़ा दिए हैं. पूरी परियोजना की कुल लागत 4,526 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
पहलगाम में हुए हमले के बाद बदले भारत के तेवर
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पहले घोषणा की थी कि वह सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित कर रहा है. यह छह दशक पुराना सीमापार जल समझौता है जो सिंधु बेसिन की छह नदियों के जल विभाजन को नियंत्रित करता है. सिंधु जल संधि स्थगित होने के बाद भारत ने कई बड़े कदम उठाए हैं. किश्तवाड़ जिले में चिनाब नदी पर बनने वाली इस रन-ऑफ-रिवर परियोजना में 109 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध शामिल होगा.
क्वार बांध के पानी को चार 5.65 मीटर व्यास वाले पेनस्टॉक्स के माध्यम से एक भूमिगत बिजलीघर में मोड़ा जाएगा. इस बिजली घर में फ्रांस में निर्मित टर्बाइन-जनरेटर इकाइयां होंगी. प्रत्येक इकाई की क्षमता 135 मेगावाट बिजली उत्पादन की होगी.
बता दें कि सिंधु जल संधि (IWT) के तहत सिंधु और उसकी सहायक नदियों को दोनों देशों के बीच विभाजित कर दिया गया था. भारत को तीन पूर्वी नदियों – सतलुज, ब्यास और रावी – के पानी का उपयोग करने की अनुमति दी गई, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – का अधिकांश हिस्सा दिया गया.
इस संधि को भारत द्वारा स्थगित किए जाने के बाद से ही पाकिस्तान में बेचैनी है. वर्ल्ड बैंक इस समझौते का गारंटर है इसलिए पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक (डब्ल्यूबी) सहित वैश्विक मंचों पर औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की दिशा में भी काम कर रहा है. दूसरी तरफ भारत के गृहमंत्री अमित शाह ये स्पष्ट कर चुके हैं कि सिंधु जल संधि अब कभी अपने पुराने स्वरूप में नहीं लौटेगी.
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