बांग्लादेश का राष्ट्रगान: जानिए किसने लिखा, क्या है अर्थ और भारत के वंदे मातरम् से कितना अलग है

बांग्लादेश में नए राजनीतिक माहौल में वहां के राष्ट्रगान को बदलने का विवाद फिर उभर आया है. सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, हालांकि राष्ट्रगान में बदलाव होगा या नहीं... इस पर अंतिम निर्णय अभी अस्पष्ट है. 

Published date india.com Published: December 11, 2025 1:30 PM IST
बांग्लादेश का राष्ट्रगान: जानिए किसने लिखा, क्या है अर्थ और भारत के वंदे मातरम् से कितना अलग है

बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद एक नया राजनीतिक-वैचारिक विवाद गहराता जा रहा है. देश का राष्ट्रीय गीत ‘अमर सोनार बांगला’ एक बार फिर बहस के केंद्र में है, जहां अंतरिम सरकार से इसे बदलने की मांग उठ रही है. विरोध करने वालों का दावा है कि यह गीत 1971 में भारत के प्रभाव में अपनाया गया था और आज के बांग्लादेश की स्वतंत्र पहचान से मेल नहीं खाता.

किसने लिखा था बांग्लादेश का राष्ट्रगान?

बांग्लादेश का राष्ट्रगान अमर सोनार बांगला मूलतः रवीन्द्रनाथ टैगोर की रचना है. उन्होंने 1905 में बंगाल के विभाजन का विरोध करते हुए इसी शीर्षक से यह गीत लिखा था. 19 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्ज़न ने धार्मिक आधार पर बंगाल के विभाजन की घोषणा की थी, जो 16 अक्टूबर से लागू हुआ. इसी माहौल में टैगोर ने दोनों हिस्सों के भावनात्मक एकत्व के लिए यह कविता लिखी, जो उसी साल बंगदर्शन पत्रिका में प्रकाशित हुई थी.

राष्ट्रगान कैसे बना ‘अमर सोनार बांगला’?

1971 में पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्र होकर बांग्लादेश बनने के बाद इस गीत की शुरुआती 10 पंक्तियों को राष्ट्रगान के रूप में चुना गया. इसकी धुन प्रसिद्ध बांग्लादेशी संगीतकार समर दास ने तैयार की. गीत बंगाल की प्रकृति, प्रेम, सौम्यता और मिट्टी से गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है.

क्यों उठा फिर से बदलाव का मुद्दा?

शेख हसीना के पद छोड़ने के बाद कुछ समूहों ने राष्ट्रगान को “थोपा हुआ” बताते हुए संशोधन की मांग की है. अब्दुल्लाहिल अमान अज़मी जमात-ए-इस्लामी के पूर्व अमीर गुलाम आज़म के बेटे ने दावा किया कि यह गीत बांग्लादेश की स्वतंत्र पहचान के विपरीत है और संविधान में भी बदलाव की जरूरत है. राष्ट्रगान बदलने की कोशिश पहली बार नहीं हो रही. इससे पहले भी यह मांग उठ चुकी है.

1975 के पहले तख्तापलट के बाद राष्ट्रपति मुश्ताक अहमद ने एक समिति बनाई थी, जिसने काज़ी नज़रुल इस्लाम के नूतनर गीत या फारूक अहमद की पंजेरी को राष्ट्रगान बनाने का सुझाव दिया था. 2002 में जमात-ए-इस्लामी नेता अमीर मतीउर रहमान निज़ामी ने इसे “इस्लामी भावनाओं के विरुद्ध” बताकर परिवर्तन की मांग रखी थी, जिसे कैबिनेट डिवीजन ने खारिज कर दिया.

बांग्लादेश का राष्ट्रगान अमर सोनार बांगला और उसका हिंदी में अर्थ

अमर सोनार बांग्ला,- मेरी सोने सी प्यारी बंगाल.
आमी तोमाय भालोबाशी।- मैं तुमसे प्रेम करता हूँ.
चिरोदिन तोमार आकाश,- तेरा नीला आसमान.
तोमार बाताश,- तेरी मनमोहिनी हवा.
आमार प्राणे बाजाय बाशी।- मेरे हृदय में मधुर बाँसुरी सा सुर जगाती है.

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ओ मा, फागुने तोर आमेर बोने- हे माँ, तेरे आम के बागों में.
घ्रोने पागोल कोरे,- फागुन की सुगंध मुझे दीवाना कर देती है.
मोरी हाय, हाय रे- उस सुगंध पर मैं निछावर हो जाता हूँ.
ओ मा, आगोमने ए आशे- हे माँ, तेरी पुकार सुनते ही.
आपोने मोदेर फीरे।- हम स्वयं ही तेरी गोद में लौट आते हैं.

पढ़िए वंदे मातरम् का अर्थ

वंदे मातरम्- हे मां, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं.
सुजलां सुफलां- जल और फलों से भरपूर (समृद्ध) देश.
मलयजशीतलाम्- मलय पर्वत के सुगंधित, शीतल पवन से शीतल भूमि.
शस्य श्यामलाम्- धान और फ़सलों से हरी-भरी धरती.
मातरम्.- हे मातृभूमि,
वंदे मातरम्॥- मैं तुम्हें नमन करता हूं.

शुभ्र ज्योत्स्ना- चांदनी की उजली, पवित्र रोशनी.
पुलकित यामिनी- जिससे रात्रि (रात) भी आनंदित हो उठती है.
फुल्ल कुसुमित- जहां फूल पूरी तरह खिले होते हैं.
द्रुमदलशोभिनीम्,- जिसके वृक्षों और उनकी डालियों से सुशोभित भूमि.
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीम्,- जो मधुर वाणी वाली तथा मुस्कान बिखेरने वाली है.
सुखदां वरदां- जो सुख देने वाली है और वरदान देने वाली मां.
मातरम्. वंदे मातरम्॥- हे मातृभूमि, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं.

सप्त–कोटि- सात करोड़ (यहां करोड़ों संतानों/नागरिकों) वाली मां.
कन्यकातर–कर–करवाले- जिनके करुणा भरे, कोमल और दानशील हाथ हैं.
अबला केनो बलदानी- तुम अबला क्यों कहलाओ? तुम तो बल (शक्ति) प्रदान करने वाली हो.
तुई आर नारी नॉय,- तुम साधारण स्त्री नहीं हो.
तुई आर नारी नॉय,- तुम सिर्फ नारी नहीं, इससे कहीं अधिक हो.
तुई शक्तिरूपिणी- तुम तो शक्ति की मूर्ति हो.
त्वां अहं नमामि- मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं.
वंदे मातरम्॥- मां, तुम्हें मेरा प्रणाम.

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