मुंबई: सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों के महाविलय के लिए तय एक अप्रैल की समयसीमा तेजी से नजदीक आ रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि ये समयसीमा आगे बढ़ सकती है क्योंकि अभी कई नियामक मंजूरियां मिलनी बाकी हैं. एक बैंक अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित महाविलय योजना को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बावजूद शेयर आदान-प्रदान अनुपात तय करना, शेयरधारकों की सहमति और अन्य नियामक मंजूरियां मिलने में कम से कम 30-45 दिन का समय लग सकता है. अधिकारी ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इन बैंकों से अगले तीन से पांच वर्ष के लिए उनके वित्तीय पूर्वानुमानों की जानकारी मांगी है. इसमें एनपीए, पूंजी आवश्यकता, ऋण वृद्धि और विलय से लागत में कमी के बारे में जानकारी मांगी गई है. Also Read - PM Kisan Samman Nidhi Yojana: 14 मई की सुबह 11 बजे पीएम मोदी किसानों को जारी करेंगे 8वीं किस्त के 19,000 करोड़ रुपये

सार्वजनिक क्षेत्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऐसे में अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से विलय को अमलीजामा पहनाए जाने की संभावना इस समय थोड़ी अवास्तवित लग रही है. नियामक मंजूरियों के अलावा विलय योजना को 30 दिनों तक संसद में भी रखा होगा, ताकि सांसद इसका अध्ययन कर सकें. बजट सत्र का दूसरा भाग दो मार्च को शुरू होगा. पिछले साल अगस्त में सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने का फैसला किया था. योजना के मुताबिक यूनाइडेट बैंक ऑफ इंडिया और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा. इस विलय के बाद यह सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. Also Read - कोरोना: ऑक्सीजन और दवाओं की आपूर्ति पर पीएम मोदी ने बुलाई उच्च स्तरीय बैठक, PMO ने दी अहम जानकारी

सिंडीकेट बैंक का केनरा बैंक के साथ विलय होना है, जबकि इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में होगा. इसी तरह आंध्रा बैंक और कोऑपरेशन बैंक को यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया में मिलाया जाएगा. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विलय की घोषणा के 10 महीने बाद भी विजया बैंक और देना बैंक के बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ विलय के लिए सूचना प्रौद्योगिकी एकीकरण की प्रक्रिया अभी भी जारी है. साथ ही मानव संसाधन संबंधी मुद्दे कारोबार को नुकसान पहुंचा रहे हैं और ग्राहकों को असुविधा हो रही है. बैंक यूनियन भी प्रस्तावित विलय का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र की समस्याओं और अर्थव्यवस्था में सुस्ती का समाधान बैंकों का विलय नहीं है. Also Read - Tamil Nadu CM Oath: एमके स्टालिन ने 33 मंत्र‍ियों के साथ ली तमिलनाडु के सीएम के पद की शपथ