चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने सिद्ध मेडिकल कॉलेज द्वारा निवर्तमान छात्रों को प्लेसमेंट रिकॉर्ड का ब्यौरा नहीं रखने के आधार पर संस्थान के एक छात्र को कर्ज देने से मना करने वाले एक राष्ट्रीयकृत बैंक को फटकार लगाई है. Also Read - 16 साल की सरोज के बैंक अकाउंट में अचानक आए 10 करोड़ रुपए, गाँव में हड़कंप, और अब...

एस नवीन की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन ने माना कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि अरानी स्थित इंडियन बैंक के कमजोर कारणों के कारण छात्र का भविष्य दांव पर लगा है. Also Read - बार-बार कैश भरने के बाद भी ATM से जल्दी ख़त्म हो जाते थे रुपए, जांच करने पर दंग रह गया बैंक

बैंक अधिकारियों को फटकार लगाते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘‘कर्ज के आवेदन को ठुकराने वाले अधिकारियों पर एक लाख रूपये का जुर्माना लगाया जाना चाहिए. हालांकि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आगे से बैंक संशोधित आईबीए मॉडल शैक्षिक ऋण योजना 2015 के संदर्भ में कार्य करेगा कोई जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है.’’ Also Read - चीन के बैंक ने भारतीय बैंक ICICI में किया निवेश, दोनों देशों में तनाव के बीच 15 हज़ार करोड़ लगाए

न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के शैक्षणिक कर्ज आवेदन पर विचार करने के लिए दायित्व लेने के बाद बैंक पर 1 लाख रुपये जुर्माना नहीं लगाया.

याचिकाकर्ता ने बताया कि 2014-15 में उसने राज्य बोर्ड परीक्षा में 1,017 अंक हासिल किए और उसने श्री साई राम सिद्ध मेडिकल कॉलेज एवं शोध संस्था में प्रारंभिक शुल्क का भुगतान करने के बाद दाखिला लिया. शेष शुल्क का भुगतान करने के लिए छात्र ने 2016 में एक बैंक में आवेदन दिया जिसे खारिज कर दिया गया था.