Banke Bihari Temple: बांके बिहारी मंदिर में टूट गई सालों पुरानी परंपरा, जानें क्या बनी वजह
मथुरा के वृंदावन में स्थित ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर में सैकड़ों साल पुरानी एक परंपरा टूट गई. दरअसल, बाल भोग और राजभोग में देरी हुई, जिसे गोस्वामी समाज नाराज है. आइए जानते हैं ये देरी किस वजह से हुई?
मथुरा के वृंदावन में स्थित ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर की एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने भक्तों को हैरान कर दिया. दरअसल, मंदिर में सालों से चली आ रही भोग लगाने की परंपरा टूट गई. बिहारी जी को समय से बाल भोग नहीं लगाया जा सका. मंदिर की दिनचर्या में भोग का विशेष महत्व होता है और समय का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है. ऐसे में परंपरा का टूटना न केवल मथुरा-वृंदावन बल्कि देशभर में चर्चा का विषय बन गया.
बाल भोग में देरी से बिगड़ा माहौल
परंपरा के अनुसार, सुबह पहले ठाकुर जी को बाल भोग लगाया जाता है, जिसे दिन की सबसे पवित्र सेवा माना जाता है. लेकिन सोमवार को हलवाई के समय पर न पहुंचने की वजह से भोग तैयार ही नहीं हो सका. इसका असर यह हुआ कि बाल भोग कई घंटों की देरी से ठाकुर जी तक पहुंचा. इसके बाद दोपहर में लगने वाला राजभोग भी समय से नहीं लग पाया, जिससे दिनभर सेवाएं अस्त-व्यस्त रहीं.
गोस्वामी समाज में नाराजगी देखी गई
जब इस बारे में गोस्वामी समाज के लोगों को पता चला, तो उनमें नाराजगी देखने को मिली. गोस्वामी समाज का कहना है कि बिहारी जी की सेवा में समय और अनुशासन का विशेष महत्व है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती. गोस्वामी समाज ने इस देरी को गंभीर चूक बताया और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए. उनका मानना है कि यदि समय रहते व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा होंगी.
हाई पावर कमेटी ने बताई देरी की वजह
मंदिर की हाई पावर कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने इस पूरे मामले पर सफाई दी. उन्होंने बताया कि भोग तैयार करने के लिए जो हलवाई नियुक्त हैं, उनके कर्मचारी समय पर मंदिर नहीं पहुंच पाए. इसी कारण भोग बनाने में देरी हुई और ठाकुर जी को समय से भोग नहीं लग सका. उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर नहीं हुआ, बल्कि व्यवस्थाओं में आई कमी की वजह से ऐसा हुआ. हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस तरह की चूक नहीं होनी चाहिए थी.
संसाधनों की कमी भी बड़ी समस्या
सेवायत हिमांशु गोस्वामी ने बताया कि मंदिर प्रबंधन के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, जिससे रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संभाला जा सके. स्टाफ की कमी और जिम्मेदारियों का सही बंटवारा न होना भी ऐसी घटनाओं की वजह बन रहा है. उन्होंने कहा कि बांके बिहारी जी मंदिर में रोज हजारों श्रद्धालु आते हैं और इतनी बड़ी व्यवस्था को संभालने के लिए मजबूत सिस्टम की जरूरत है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.