नई दिल्ली: सरकारी बैंकों के प्रबंधन भारतीय बैंक संघ के दो प्रतिशत वेतन वृद्धि के प्रस्ताव के विरोध में बैंक कर्मियों की दो दिवसीय हड़ताल  के पहले दिन देश भर के सरकारी बैंकों में बैंकिंग सेवाएं बाधित रहीं. हालांकि निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक में काम सामान्य तौर पर चल रहा है. सिर्फ चेक क्‍लीयरेंस जैसी कुछ सेवाएं बाधित हुई हैं. हड़ताल के महीने के आखिर में पड़ने से बैंक शाखाओं से वेतन की निकासी प्रभावित हुई है, वहीं कुछ एटीएम मशीनों के प्रभावित होने की भी संभावना है. इसके अलावा शाखाओं में जमा, सावधि जमा का नवीनीकरण, सरकारी खजाने से जुड़े काम, मुद्रा बाजार से जुड़े इत्यादि अन्य कामों पर इस हड़ताल का असर देखा गया.

महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान में व्‍यापक असर 
हड़ताल का महाराष्ट्र, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान जैसे राज्‍यों में व्यापक असर दिखा और बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहे. देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में सरकारी बैंकों की शाखाएं या तो बंद रही या फिर उनमें बहुत कम काम हुआ. वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कर्मचारियों ने दक्षिण मुंबई के पी एम रोड से आजाद मैदान तक मार्च भी निकाला. मध्य प्रदेश की करीब 5,000 बैंक शाखाओं में भी कामकाज बाधित रहा. युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) की मध्यप्रदेश इकाई के संयोजक एमके शुक्ल ने बताया कि हड़ताल के पहले दिन सूबे में सभी 21 सरकारी बैंकों और निजी क्षेत्र के 11 पुराने बैंकों की लगभग 5,000 शाखाओं में अलग-अलग सेवाएं बाधित रहीं. हड़ताल में करीब 18,000 बैंक कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं. इनमें निजी क्षेत्र के पुराने बैंकों के लगभग 2,000 कारिंदे शामिल हैं. राजस्थान की विभिन्न बैंकों के 30 हजार कर्मचारियों ने भी देशव्यापी हड़ताल में हिस्सा लिया, जिससे बैंकिग सेवाएं प्रभावित हुईं. यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के राजस्थान संयोजक महेश मिश्रा ने दावा किया कि बैंकिग हड़ताल से प्रदेश में प्रतिदिन करीब 10 हजार करोड़ रूपये का लेन-देन प्रभावित होगा. उन्होंने बताया कि देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में प्रदेश में विभिन्न बैंकों की लगभग 5 हजार 500 शाखाएं बंद हैं और बैंकों के 30 हजार कर्मचारी हड़ताल पर हैं.

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बैंक यूनियनों का दावा, हड़ताल के सिवा कोई विकल्‍प नहीं 
अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सी एच वेंकटाचलम ने कहा कि बैंक और उनके कर्मचारी संघों के बीच कई दौर की वार्ताओं के विफल होने के बाद यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंकिंग यूनियन (यूएफबीयू) ने प्रस्तावित दो प्रतिशत वेतन वृद्धि के विरोध में दो दिन की हड़ताल पर जाने का निर्णय किया है, क्योंकि पिछली बार 15% की वेतन वृद्धि दी गई थी.’’ यूएफबीयू नौ बैंकों के कर्मचारी संघों का सम्मिलित संगठन है. अखिल भारतीय बैंक अधिकारी परिसंघ (एआईबीओसी) के संयुक्त महासचिव रविंद्र गुप्ता ने कहा, ‘‘इस तरह की वेतन वृद्धि का प्रस्ताव, एक तरह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मियों का अपमान है. हमारे पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था.’’ उन्होंने कहा कि सरकार की मुद्रा योजना, जनधन योजना और नोटबंदी जैसी सभी योजनाओं की सफलता सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुनिश्चित करते हैं और बदले में उसके कर्मचारियों को सिर्फ दो प्रतिशत वेतन वृद्धि की पेशकश की जाती है. यह उन बैंक कर्मियों के साथ अन्याय है जो देश निर्माण में कठिन परिश्रम करते हैं.

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करीब 10 लाख बैंककर्मी हड़ताल में शामिल
वेंकटाचलम ने कहा कि देशभर में करीब 10 लाख बैंक कर्मी इस हड़ताल में भाग ले रहे हैं. उल्लेखनीय है कि देश में 21 सरकारी बैंकों की करीब 85,000 शाखाएं हैं जिनकी बाजार हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है. इस हड़ताल में शामिल होने की जानकारी भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा समेत अधिकतर बैंकों ने पहले ही दे दी थी.

 

इनपुट: एजेंसी