नई दिल्ली: लगातार बैंकिंग घोटाले सामने आने से चिंतित वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 50 करोड़ रुपए से अधिक के गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) खातों की जांच करने और उनमें किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर इसकी सूचना सीबीआई को देने का निर्देश दिया है. वित्तीय सेवा सचिव राजीव कुमार ने कहा कि परिचालन एवं प्रौद्योगिकी के बढ़ते जोखिम के मद्देनजर खामियों की पहचान कर आवश्यक तैयारी के संबंध में प्राथमिक कदम उठाने के लिए सार्वजनिक बैंकों को 15 दिन का समय दिया गया है. पीएनबी घोटाले की राशि बढ़कर 12,700 करोड़ रुपए होने के साथ उन्होंने यह बात कही.

सार्वजनिक बैंकों के कार्यकारी निदेशकों तथा मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारियों को बढ़ते जोखिम से निपटने के लिए रूपरेखा तैयार करने के लिए कहा गया है. कुमार ने ट्वीट किया, ‘‘परिचालन एवं प्रौद्योगिकी संबंधी जोखिमों के बढ़ने के मद्देनजर कमियों की पहचान करने, उन्हें दूर करने, प्राथमिक कदम उठाने, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं से सीख तकनीकी समाधान समेत रणनीति तैयार करने तथा वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही स्पष्ट करने के लिए सार्वजनिक बैंकों को 15 दिन की समयसीमा दी गई है.’’

सचिव ने कहा, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिया गया है कि बैंक धोखाधड़ी और कर्ज चुकाने में चूक के मामलों को पकड़ें. साथ ही संभावित धोखाधड़ी से बचने के लिए 50 करोड़ रुपए से अधिक के एनपीए खातों की जांच करें.’’ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से पीएमएलए, फेमा और अन्य उल्लंघनों की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) के साथ मिलकर चलने को कहा गया है.

कुमार ने कहा कि संबंधित बैंक के मुख्य सतर्कता अधिकारी को शिकायत की जांच करनी होगी और 50 करोड़ रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामलों में सीबीआई को सहयोग करना होगा. इसके अलावा बैंकों को केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो (सीईआईबी) से एनपीए बनने जा रहे खातों के बारे में स्थिति रिपोर्ट मांगनी होगी. सीईआईबी को बैंक द्वारा मांगी गई इस तरह की जानकारी एक सप्ताह में देनी होगी.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एनपीए खाते को सिर्फ राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पास भेजने से ही बैंक या प्रवर्तकों या कंपनियों को गड़बड़ी करने से नहीं रोका जा सकता. भारतीय रिजर्व बैंक के कहने पर जो 12 बड़े एनपीए खाते एनसीएलटी के पास भेजे गए हैं, उनमें बकाया कर्ज 1.75 लाख करोड़ रुपए का है. दूसरी सूची में रिजर्व बैंक ने 29 बड़े एनपीए खातों की पहचान की है और बैंकों से उनका निपटान दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के जरिये करने को कहा है.