नई दिल्ली/अगरतला. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के कथित आरोप, जिसमें कहा गया था कि दूरदर्शन और आकाशवाणी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके भाषण को प्रसारित करने से इनकार कर दिया, ने नया रूप ले लिया है. मोदी के सहयोगात्मक संघवाद वाली सोच पर हमला करते हुए सत्ताधारी सीपीएम ने इसकी निंदा की है. बता दें कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने कथित तौर पर मणिक सरकार से उनके भाषण को नया रूप देने को कहा था. Also Read - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया कोविड से जूझ रहे मिल्खा सिंह की हालत का जायजा

राज्य सरकार ने इसे ‘अलोकतांत्रिक, निरंकुश और असहिष्णु कदम’ करार दिया. दूरदर्शन और आकाशवाणी का संचालन संभालने वाले प्रसार भारती से इस मामले में फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी. त्रिपुरा सरकार की ओर से जारी बयान में आरोप लगाया गया कि दूरदर्शन और आकाशवाणी ने गत 12 अगस्त को सरकार का भाषण रिकॉर्ड कर लिया और 14 अगस्त की शाम सात बजे मुख्यमंत्री कार्यालय को एक पत्र के जरिए सूचित किया गया कि उनके भाषण को जब तक नया रूप नहीं दिया जाता तब तक इसे प्रसारित नहीं किया जाएगा. Also Read - CBSE 12th Result Update: 12वीं परीक्षा के रिजल्ट का क्या होगा क्राइटेरिया? जानें CBSE ने क्या कहा; क्या है ताजा अपडेट...

मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने भाषण में एक शब्द भी नहीं बदलेंगे तथा इस कदम को उन्होंने ‘अलोकतांत्रिक, निरंकुश और असहिष्णु’ करार दिया. सरकार का भाषण स्वतंत्रता दिवस के दिन त्रिपुरा में दूरदर्शन और आकाशवाणी पर प्रसारित होना था. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि दूरदर्शन, आरएसएस-भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने लोगों को निर्देश दे रहे हैं कि विपक्ष की आवाज को दबा दिया जाए, जिसमें कि एक निर्वाचित मुख्यमंत्री शामिल हैं. Also Read - CBSE 12th Exam Cancelled: 12वीं की परीक्षा रद्द करने के फैसले पर बोले PM-'छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता'

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सीपीएम नेता बृंदा करात ने इसकी निंदा की और इसे अपमानजनक, पूरी तरह गलत बताया. उन्होंने कहा, ‘श्रीमान मोदी सहयोगी संघीय ढांचे की बात करते हैं, उनकी सरकार के कार्यकाल में, दूरदर्शन ने स्पीच को सेंसर किया और त्रिपुरा के सीएम का भाषण ब्रॉडकास्ट करने से इनकार कर दिया. क्या यही सहयोगात्मक संघवाद है?’ बृंदा करात ने पूछा कि एक चुने हुए मुख्यमंत्री के अपमान का यही तरीका है? दूरदर्शन को एक चुने हुए मुख्यमंत्री के भाषण को सेंसर करने की कोशिश का अधिकार किसने दिया? यह अपमानजनक और पूरी तरह गलत है?

71वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह भी लंबे वक्त तक मुख्यमंत्री रहे हैं. उन्होंने कहा था, ‘मैं जानता हूं कि देश के विकास के लिए राज्य महत्वपूर्ण हैं. मैं मुख्यमंत्रियों और राज्य सरकारों की महत्ता को समझता हूं. और अब हम सभी फैसले साथ ले रहे हैं.’ 

दूरदर्शन के कथित इनकार पर सीपीएम के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया, ‘दूरदर्शन ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार का भाषण प्रसारित करने से इनकार किया. क्या प्रधानमंत्री मोदी इसी सहयोगात्मक संघवाद की बात करते हैं? शर्म की बात है.’ सीपीएम ने माणिक सरकार के भाषण की कॉपी भी ट्वीट की जिसे कथित तौर पर डीडी ने नहीं चलाया. माना जा रहा है कि पार्टी का परोक्ष इशारा प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन की ओर था. येचुरी ने ट्वीट पर टैग करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि चैनल द्वारा सरकार का भाषण प्रसारित करने से मना करना ‘गैरकानूनी’ है.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘अगर यह तानाशाही और अघोषित आपातकाल नहीं है तो क्या है? सीपीएम, त्रिपुरा की जनता और हमारे सभी नागरिक इससे लड़ेंगे.’

(भाषा से प्राप्त जानकारी के साथ)