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नई दिल्ली, 20 जनवरी | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के ठीक बाद गणतंत्रता दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में अगले सप्ताह भारत आ रहे अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत में निवेश की कई घोषणाएं कर सकते हैं, जो ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम को गति देने वाला साबित होगा। विश्वस्त सूत्रों से यह जानकारी मिली।  गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान अमेरिका ने भारत के साथ अपनी कारोबारी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए भारत में 41 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की थी। Also Read - कौन अपनी दम पर पैदा कर रहा रोजगार, कितने हैं प्रवासी मजदूर, देश में पहली बार होगा सर्वे, मोदी सरकार की ये है योजना

अद्योगिकी नीति एवं प्रचार विभाग (डीआईपीपी) में सचिव अमिताभ कांत मेक इन इंडिया कार्यक्रम की व्यापकता बढ़ाने के लिए वाशिंगटन में मंगलवार को एक टीम की अध्यक्षता कर रहे हैं, जिसमें भारत में निवेश की इच्छुक सभी अमेरिकी कंपनियां भी हिस्सा लेंगी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक सूत्र ने आईएएनएस से कहा कि इस कार्यक्रम में भारत में कारोबार करने के माहौल में हुए सुधार के बारे में बताया जाएगा और इसके अलावा अमेरिकी निवेशकों को एक स्थायी नीति के प्रति आश्वस्त किया जाएगा। भारतीय प्रतिनिधिमंडल निवेश हासिल करने के उद्देश्य से कुछ शीर्ष कंपनियों के अधिकारियों से मुलाकात करेगा। Also Read - यूपी: इटावा में ट्रक पलटने से 12 श्रद्धालुओं की मौत, 45 घायल, पीएम मोदी ने जताया दुख

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, ओबामा की भारत यात्रा के दौरान बौद्धिक संपदा अधिकार एवं द्विपक्षीय निवेश संधी (बीआईटी) पर समझौता उनके एजेंडा में प्राथमिकता पर रहेगा। वाणिज्य मंत्रालय के सूत्र ने बताया कि बौद्धिक संपदा अधिकार, विनिर्माण के क्षेत्र में निवेश, कृषि उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने और वीजा नियमों का सरलीकरण जैसे विभिन्न मुद्दों पर कार्यकारी समूह की कई बैठकें की जाएंगी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण और अमेरिका के कारोबार प्रतिनिधि माइकल फ्रोमैन कारोबार नीति मंच (टीपीएफ) के अधीन गठित इन कार्यकारी समूहों की संयुक्त रूप से अध्यक्षता करेंगे। अमेरिका लंबे समय से भारत के बौद्धिक संपदा अधिकार कानून को सख्त बनाने के लिए दबाव डालता रहा है। ओबामा के आगमन पर भारत के अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में अरबों डॉलर के निवेश पर दोनों देशों के अधिकारी काम कर रहे हैं, हालांकि मेक इन इंडिया अभियान के कारण सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश पर कुछ समस्याएं बताई जा रही हैं।

सरकार ने पिछले महीने 1,000 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की घोषणा की, हालांकि मेक इन इंडिया अभियान के तहत सभी परियोजनाओं में भारत में निर्मित सौर प्लेटें और मॉड्यूलों का इस्तेमाल करना अनिवार्य किया गया है। सरकार के इस निर्देश से कथित तौर पर अमेरिका नाराज है। अमेरिका ने इस मुद्दे पर भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के कार्यक्रम में शिकायत भी की थी। इन मुद्दों के अलावा भारत अपने पेशेवर नागरिकों के लिए अमेरिकी विजा नियमों के सरलीकरण और भारतीय श्रमिकों को अधिक सामाजिक सुरक्षा योगदान में छूट देने पर संधि करने का मुद्दा भी उठाएगी।

दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी आर्थिक सहयोग पर एजेंडा तय करने के लिए 26 जनवरी को बैठक करेंगे।