Farmers Tractor Rally Violence: दिल्ली में किसान संगठनों द्वारा आयोजित ट्रैक्टर रैली में जो हिंसा और उपद्रव देखने को मिला, उसकी रूपरेखा तो कई दिन पहले ही तैयार हो गई थी. अब इसपर बड़ा सवाल उठता है कि सुरक्षा एजेंसियों से कैसे इतनी बड़ी चूक हो गई.  अलगाववादी खालिस्तानी समूह, सिख फॉर जस्टिस, जो विदेश में बैठ कर कट्टरपंथी गतिविधियों का संचालन करता है, इसके चीफ आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने लालकिला पर झंडा फहराने वाले को 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर देने का एलान किया था.Also Read - Delhi Violence: पुलिस को झटका, कोर्ट ने दंगों की जांच की तफ्तीश के दिए आदेश, पूछा- किसे बचाने की कोशिश की?

सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह सवाल उठा भी था. तो ऐसे में जब पन्नू का यह संदेश पुलिस के पास था, तो उसके मुताबिक ट्रैक्टर रैली से निपटने के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए. अब इस चूक को लेकर सुरक्षा एजेंसियों से जवाब मांगा गया है. अब सवाल यह उठता है कि क्या दिल्ली पुलिस और दूसरी केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने पन्नू के एलान को हल्के में लिया था. Also Read - दिल्ली हिंसा के आरोपी उमर खालिद की जमानत याचिका टली, UAPA के तहत चल रहा केस

बता दें कि गुरपतवंत सिंह पन्नू, जिसके संगठन की ओर से दो सप्ताह पहले ही अनेक लोगों के पास ऐसी कॉल आना शुरू हो गई थी. यह संदेश था कि 26 जनवरी आ रही है और लाल किले पर, एक भारतीय तिरंगा है. 26 जनवरी को तिरंगा हटाओ और इसे खालिस्तान के झंडे से बदल दो. इस मैसेज में ही उन्होंने यह भी कहा था जो लोग भारतीय तिरंगा हटा देंगे, उन्हें 2.5 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेंगे. ढाई लाख अमेरिकी डॉलर के अलावा, सिख फॉर जस्टिस ने युवा किसान प्रदर्शनकारियों को लुभाने के लिए विदेशी नागरिकता देने का दांव भी चला था. Also Read - कोर्ट ने दिल्ली दंगे की जांच को बताया एकतरफा, दिल्ली पुलिस पर 25 हजार का जुर्माना लगाया

आतंकी पन्नू का कहना था कि दुनिया के कानून आपके साथ हैं. अगर भारत सरकार आप पर उंगली उठाती है, तो आपको और आपके परिवारों को संयुक्त राष्ट्र कानूनों के तहत विदेश लाया जाएगा. ट्रैक्टर रैली के तीन चार दिन पहले ऐसे मैसेज जारी होने की संख्या बढ़ती चली गई.