नई दिल्ली: बीमा कार्यक्रमों के विभिन्न पैकेजों के दायरे में नहीं आने वालों और महंगे इलाज की जरूरत वाले आयुष्मान भारत के लाभार्थियों को राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) कार्यक्रम के तहत 15 लाख रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी.

आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोगय योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के लाभार्थी होने की स्थिति में जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों को उपचार नहीं मिलने की शिकायतों के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आरएएन की योजना के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

सभी सरकारी अस्पतालों, सभी क्षेत्रीय कैंसर केंद्र, सभी राज्यों के स्वास्थ्य सचिवों, व्यय विभाग और बीमा कार्यक्रम लागू करने वाले शीर्ष संगठन राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) को पत्र जारी किया गया है.

संशोधित दिशा-निर्देश के साथ पत्र में कहा गया है, ”अगर चिकित्सा परामर्श के तहत सुझाया गया उपचार एबी-पीएमजेएवाई के मंजूर किसी भी सूचीबद्ध पैकेज के तहत नहीं आता है तो आरएएन की योजना से 15 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता एबी-पीएमजेएवाई के लाभार्थियों को दी जा सकती है.”

पत्र में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में लाभार्थियों को संबंधित सरकारी अस्पतालों से प्रमाणित किया जाएगा कि उनकी दशा एबी-पीएमजेएवाई के तहत कवर योग्य नहीं है. इसलिए, मरीज को आरएएन के तहत वित्तीय सहायता मुहैया कराने की अनुमति मिलनी चाहिए.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और एनएचए ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि एबी-पीएमजेएवाई के तहत वंचित उपचार वाले मरीजों को आरएएन कार्यक्रम के तहत कवर किया जा सकता है. उन्होंने मंत्रालय का ध्यान मरीजों के ऐसे मामलों की ओर दिलाया था, जिनका पीएमजेएवाई के तहत इलाज से मना कर दिया गया क्योंकि ब्‍लड कैंसर, लीवर से जुड़ी बीमारी और अंग प्रतिरोपण जैसे मामले कार्यक्रम के तहत दर्ज 1393 मेडिकल पैकेज में नहीं आते.

इससे पहले, नवंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और इसकी बजाए एनएचए को सुझाव दिया था कि वह पीएम-जेएवाई के तहत ‘प्रक्रिया’ के अंतर्गत अंगों के प्रतिरोपण को शामिल करे और प्रति वर्ष पांच लाख रुपए की सीमा को बढ़ाए ताकि पीएम-जेएवाई के तहत योग्य मरीज योजना में फायदा उठा सके.