Migrant Laborers Data: कोरोना काल में कितने प्नवासी मजदूर अपने घरों को लौटे, कितनों की रास्ते में मौत हुई. इसपर केंद्र सरकार ने पहले कहा कि कितने मजदूरों की मौत हुई इसका डाटा हमारे पास नहीं है. लेकिन फिर बाद में संसद में आंकड़े पेश किए गए, जिन आंकड़ों के अनुसार, एक करोड़ से अधिक प्रवासी मजदूर लॉकडाउन की वजह से अपने घरों को लौट गए और  9 सितंबर तक कुल 97 मजदूरों की मौत हुई थी. इसकी जानकारी केंद्रीय श्रम और रोजगार मामलों के मंत्री ने संसद को दी है.Also Read - पंजाब में सार्वजनिक स्थानों पर मास्क अनिवार्य, कोरोना के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार का फैसला

सबसे ज्यादा घर लौटे मजदूर यूपी-बिहार के Also Read - Corona virus in Delhi: दिल्ली में कोरोना 2,136 नये मामले सामने आये, संक्रमण से 10 लोगों की मौत

मंत्री ने संसद में राज्यवार उन मजदूरों का डाटा शेयर किया, जो कोरोना की वजह से अपने घर वापस लौट गए और उपलब्ध डाटा के अनुसार, सबसे अधिक प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश (32.5 लाख), बिहार (15 लाख) और पश्चिम बंगाल (13.8 लाख) को लौटे हैं, लेकिन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों लौटे मजदूरों का डाटा सरकार के पास मौजूद नहीं हैं. Also Read - Corona Virus In India: तेजी से फैल रहे हैं ओमिक्रॉन के नए वेरिएंट, 20 से 30 प्रतिशत हैं ज्यादा संक्रामक, बरतें पूरी सावधानी

मजदूरों के लिए चलाई गईं स्पेशल ट्रेनें

रेलवे और कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में बताया कि भारतीय रेलवे ने कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई थीं. 1मई से 31 अगस्त तक 4,621 श्रमिक ट्रेनें चलाई गईं और इनके माध्यम से 63.19 लाख मजदूरों को देशभर के कोने-कोने में उनके घर पहुंचाया गया.

ट्रेन में मजदूरों को मुफ्त दिया गया खाना-पैकेटबंद पानी

रेलवे द्वारा प्रवासी मजदूरों को दी गई सुविधाओं के जवाब में रेलवे मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन के यात्रियों को 1.96 करोड़ मूल्य का खाना और 2.19 करोड़ मूल्य के पैकेटबंद पानी मुहैया कराया गया. वहीं, राज्य सरकारों द्वारा भी 46.2 लाख मील (खाने) और बोतल बंद पानी यात्रा के दौरान मजदूरों को उपलब्ध कराया गया था.

बिहार-यूपी पहुंची सबसे ज्यादा ट्रेनें

मंत्रालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात ने प्रवासी मजदूरों के लिए 1033 और महाराष्ट्र ने 817 ट्रेनें मंगवाई थीं. आंकड़ों के मुताबिक, बिहार और उत्तर प्रदेश में क्रमश: 1627 और 1726 ट्रेनें पहुंचीं. आंकड़ों के मुताबिक, 45 फीसदी मजदूर यूपी और बिहार के हैं.  रेलवे में श्रमिकों से किसी तरह का किराया नहीं लिया. श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को राज्य सरकारों या राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों द्वारा बुक किया गया था.राज्यों से 433 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था.