नई दिल्ली: अभी फेसबुक पर आपकी जानकारी लीक किए जाने का मामला शांत नहीं हुआ था कि अब किसी ऐप के सहारे भी आपकी जानकारी लीक करने का मामला सामने आया है. सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की जानकारी चुराए जाने को लेकर जारी विवाद के बीच विशेषज्ञों ने स्मार्टफोन में तीसरे पक्ष यानी बाहरी ऐप से जुड़े जोखिमों के प्रति भी आगाह किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन पर इस तरह के ‘थर्ड पार्टी ऐप’ को पहुंच के स्तर के बारे में सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि ऐसे ऐप को उपयोग करने वालों की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है.Also Read - Salman Khan ने पड़ोसी पर किया मानहानि का केस, कोर्ट का अंतरिम आदेश देने से इनकार, यूट्यूब, FB, ट्विटर और गूगल भी हैं पक्षकार

इन दिनों यह काफी चर्चा में है और विवाद खड़ा है कि 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म केंब्रिज एनालिटिका ने पांच करोड़ फेसबुक यूजर्स से जुड़ी जानकारी उनकी सहमति के बिना हासिल की. नेटवर्क इंटेलीजेंस के प्रमुख वैश्विक व्यापार अल्ताफ हाल्दे ने कहा कि यूजर्स को केवल सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें अपने स्मार्टफोन पर थर्ड पार्टी ऐप को दी जाने वाली पहुंच के प्रति भी आगाह रहना चाहिए. Also Read - Bully Bai APP की जांच: मुंबई पुलिस का दावा, गुमराह करने के लिए सिख नामों का इस्तेमाल किया गया

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अनेक गेम अपने यूजर्स से उनकी मित्र सूची तक पहुंच या पाठ्य संदेश मैसेज पढ़ने की अनुमति मांगते हैं. उन्होंने कहा, ‘किसी गेम ऐप को मेरी एड्रेस बुक का क्या करना है. आमतौर पर लोग इस पर ध्यान नहीं देते लेकिन इसके काफी प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं.’ Also Read - Facebook Tips & Tricks: क्या आपका अकाउंट भी हो गया है लॉक? तो इस प्रोसेस की मदद से करें अनलॉक

केस्परस्की लैब में महाप्रबंधक श्रेणिक भयानी ने कहा, साइबर सुरक्षा के लिहाज से फेसबुक की यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है. जब तक हम दुष्प्रभावों को नहीं देखते हम किसी खतरे को भांप नहीं पाते. अगर फेसबुक जैसी बड़ी कंपनी से डेटा चुराया जा सकता है तो हम कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हमारे व्यक्तिगत डेटा का दुरूपयोग साइबर अपराधी नहीं कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक जैसी घटनाएं न तो पहली है और न ही यह आखिरी होगी. एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं हुआ है कि डेटा चुराया गया है और निश्चित रूप से यह आखिरी बार भी नहीं हो रहा है. अच्छी बात तो यह है कि सरकार व निजी कंपनियां अपने पास मौजूदा नागरिकों के डेटा की रक्षा को महत्ता दे रही हैं.’