
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Bharat Bandh Latest News: आज यानी गुरुवार को देश के विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों ने एक बड़े भारत बंद का आह्वान किया है, जिसका व्यापक असर कई राज्यों में सरकारी कामकाज, बैंकों और परिवहन सेवाओं पर पड़ने की आशंका है. इस बंद का मुख्य केंद्र 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का एक संयुक्त मंच है, जिसमें इनटक, एआईटीयूसी, सीटू और एचएमएस जैसे बड़े संगठन शामिल हैं.
इन संगठनों के विरोध का सबसे बड़ा कारण पिछले साल लागू किए गए चार नए लेबर कोड्स हैं. मजदूरों का मानना है कि इन नए कानूनों के आने से उनके अधिकार पहले के मुकाबले काफी कमजोर हो गए हैं और कंपनियों को यह छूट मिल गई है कि वे जब चाहें कर्मचारियों को नौकरी से निकाल सकें.
संगठनों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इससे श्रमिकों की जॉब सिक्योरिटी खत्म हो गई है और निजीकरण को बढ़ावा मिलने से सामाजिक सुरक्षा में भी भारी कमी आई है. इन मांगों के अलावा मजदूर संगठन ड्राफ्ट सीड बिल, बिजली संशोधन विधेयक और शांति बिल जैसे प्रस्तावों को वापस लेने के साथ-साथ मनरेगा को प्रभावी ढंग से बहाल करने की मांग भी कर रहे हैं.
बैंकिंग सेवाओं की बात करें तो सरकारी बैंकों के ग्राहकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक या बैंकों ने किसी आधिकारिक छुट्टी की घोषणा नहीं की है, लेकिन कई बड़ी बैंक यूनियनों ने इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया है.
ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन और अन्य संगठनों द्वारा हड़ताल में शामिल होने के कारण शाखाओं में चेक क्लीयरेंस, नकद जमा और निकासी जैसी सेवाएं बाधित रह सकती हैं. देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने भी संकेत दिए हैं कि बंद की वजह से उनके कामकाज पर प्रभाव पड़ सकता है.
हालांकि राहत की बात यह है कि ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, नेट बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रूप से चलने की उम्मीद है. वहीं निजी क्षेत्र के बैंकों में कामकाज पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है, इसलिए बैंकिंग जरूरतों के लिए ग्राहक डिजिटल माध्यमों का रुख कर सकते हैं.
परिवहन और आम जनजीवन पर भी इस बंद का साया मंडरा रहा है. देश के कई हिस्सों में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है, जिससे बस और टैक्सी सेवाएं प्रभावित होंगी. कई राज्यों में स्थानीय संगठनों द्वारा बाजारों को बंद रखने की अपील की गई है, जिसके कारण बाजार और दुकानें बंद मिल सकती हैं. सरकारी दफ्तरों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति कम रहने का अनुमान है.
हालांकि, बंद के दौरान मानवीय संवेदनशीलता का ध्यान रखते हुए अस्पताल, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को इससे मुक्त रखा गया है. हवाई अड्डों पर भी सेवाएं जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन सड़कों पर प्रदर्शन के कारण यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने में मशक्कत करनी पड़ सकती है.
छात्रों के लिए स्थिति थोड़ी असमंजस भरी है क्योंकि पूरे देश में स्कूल-कॉलेज बंद करने का कोई केंद्रीय आदेश नहीं है, लेकिन केरल, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थानीय प्रभाव के कारण शिक्षण संस्थान बंद रह सकते हैं. इस आंदोलन में किसानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है.
संयुक्त किसान मोर्चा और ऑल इंडिया किसान सभा ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. किसानों का आरोप है कि सरकार विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों के दबाव में काम कर रही है और इस ट्रेड डील के माध्यम से डेयरी उत्पादों, सोयाबीन और पशु चारे के आयात को हरी झंडी दे रही है.
किसानों का तर्क है कि यदि अमेरिका और अन्य देशों से सस्ते कृषि उत्पाद भारत में आने लगे, तो स्थानीय किसानों की कमर टूट जाएगी और उन्हें अपनी फसल का सही दाम नहीं मिलेगा. वे वाणिज्य मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स के जरिए घरेलू कृषि और डेयरी सेक्टर को जानबूझकर खतरे में डाला जा रहा है.
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