Bharat Biotech MD Krishna Ella: भारत के औषधि नियामक ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित ऑक्सफोर्ड कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ और भारत बायोटेक के स्वदेश में विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ के देश में सीमित आपात इस्तेमाल को रविवार को मंजूरी दे दी, जिससे व्यापक टीकाकरण अभियान का मार्ग प्रशस्त हो गया है. Also Read - Coronavirus Vaccination: इस देश ने कोविड-19 के लिए भारत में बनी एस्ट्राजेनेका के टीके को दी मंजूरी

हालांकि अब इसको लेकर विपक्ष के नेता कुछ सवाल खड़े कर रहे हैं. विपक्षी नेताओं के हर सवाल का जवाब देते हुए स्वदेश में विकसित टीके ‘कोवैक्सीन’ की निर्माता कंपनी भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने कहा है कि उनकी कंपनी ने केवल भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन सहित 12 देशों में क्लीनिकल ट्रायल किए हैं. उन्होंने ये भी कहा कि ‘कोवैक्सीन’ का पाकिस्तान में भी ट्रायल चल रहा है. Also Read - पाक से राजस्थान आए करीब 700 लोग 'लापता', केंद्र ने राज्य सरकार को दिए तलाशने के निर्देश

बता दें कि कांग्रेस नेता शशि थरूर ने बिना तीसरे चरण के परीक्षण के भारत बायोटेक के कोविड वैक्सीन को मंजूरी देने के लिए सरकार की जमकर खिंचाई की थी. थरूर ने कहा था, “हम सिर्फ इतना ही कह रहे हैं कि अगर टीका प्रभावी रूप से काम किया तो ये हमारे लिए गर्व की बात होगी. लेकिन तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षण से पहले इसे मंजूरी देना वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, जो अब तक कहीं भी दुनिया में नहीं हुआ है. अंध राष्ट्रभक्ति कॉमन सेंस का विकल्प नहीं हो सकती.” Also Read - Covaxin Latest Updates: राज्यों में पहुंचना शुरू हुई वैक्सीन, भारत बायोटेक ने 11 शहरों में भेजी कोवैक्सिन, 3 दिन बाद लगेंगे टीके

इस पर भारत बायोटेक के एमडी कृष्णा एल्ला ने कहा, “हम सिर्फ भारत में ही क्लिनिकल ट्रायल नहीं कर रहे हैं. हमने ब्रिटेन सहित 12 से अधिक देशों में क्लिनिकल ट्रायल किए हैं. हम पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों में क्लिनिकल ट्रायल कर रहे हैं. हम केवल भारतीय कंपनी नहीं हैं, हम वास्तव में एक वैश्विक कंपनी हैं.”

विपक्ष के नेताओं के सवालों को लेकर उन्होंने कहा, “अब जब टीके का राजनीतिकरण किया जा रहा है, मैं यह स्पष्ट रूप से बताना चाहता हूं कि मेरे परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ा है.”

उन्होंने कहा, “भारत बायोटेक ने रविवार को कहा कि उसके कोविड-19 वैक्सीन के आपात उपयोग के लिए मंजूरी भारत में नवाचार के लिए एक बड़ी छलांग है. यह देश के लिए गर्व का क्षण है और भारत की वैज्ञानिक क्षमता में एक महान मील का पत्थर है, भारत में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक शानदार शुरुआत है.”

कृष्णा एल्ला ने कहा कि कई लोग कहते हैं कि मैं अपने डेटा को लेकर पारदर्शी नहीं हूं. मुझे लगता है कि लोगों को इंटरनेट पर पढ़ते समय धैर्य रखना होना चाहिए, हमने कितने लेख प्रकाशित किए हैं. 70 से अधिक लेख विभिन्न अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं.

उन्होंने कहा, “बहुत से लोग सिर्फ गपशप करते हैं, यह सिर्फ भारतीय कंपनियों के खिलाफ एक प्रतिक्रिया है. जो कि हमारे लिए सही नहीं है. हम ये डिजर्व नहीं करते हैं. मर्क के इबोला वैक्सीन ने कभी भी ह्यूमन क्लीनिकल ट्रायल पूरा नहीं किया, लेकिन डब्ल्यूएचओ ने लाइबेरिया और गिनी के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दे दी.”

उन्होंने कहा कि यहां तक कि अमेरिकी सरकार का कहना है कि यदि किसी कंपनी के पास अच्छा टीकाकरण डेटा है तो आपातकालीन प्राधिकरण दिया जा सकता है. चरण -3 परीक्षण पूरा होने से पहले ही मर्क के इबोला वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग के लिए प्राधिकरण मिल गया था. जॉनसन एंड जॉनसन ने 87 लोगों पर परीक्षण किया और आपातकालीन लाइसेंस प्राप्त किया.”

भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा एला ने कहा, आपातकालीन उपयोग के लिए कोवैक्सीन को मंजूरी राष्ट्र के लिए एक गर्व का क्षण है और भारत की वैज्ञानिक क्षमता में एक बड़ा मील का पत्थर है. ये वैक्सीन इस महामारी के दौरान एक जरूरी चिकित्सा आवश्यकता को पूरा करेगी, लेकिन हमारा लक्ष्य इसे जन जन तक पहुंचाना है. उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन कई वायरल प्रोटीनों के लिए मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया देता है.

डॉ. एला ने कहा, कोवैक्सीन का विकास वास्तव में सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ भारत बायोटेक, आईसीएमआर, एनआईवी के बीच एक निजी साझेदारी है. हम इस परियोजना में दूरदर्शी नेतृत्व के लिए आईसीएमअर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव को तहे दिल से धन्यवाद देते हैं.

कोवैक्सीन दो बार लेने वाली एक वैक्सीन है, जिसका 300 मिलियन से अधिक खुराक का निर्माण सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया गया है. कोवैक्सीन के तीसरे चरण का नैदानिक परीक्षण नवंबर के मध्य में शुरू हुआ. पूरे भारत में 26,000 स्वयंसेवकों पर ट्रायल का लक्ष्य रखा गया. यह कोविड-19 वैक्सीन के लिए भारत का पहला और एकमात्र सबसे बड़ा प्रभावकारिता अध्ययन है.