नई दिल्ली: आज भीमा कोरेगांव लड़ाई की 202वीं वर्षगांठ है. प्रशासन को उम्मीद है कि पुणे जिले के पर्ने गांव में में भारी भीड़ पहुंच सकती हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन की तरफ से युद्ध स्मारक जयस्तंभ के पास भारी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं. किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए पुलिस की कई कंपनियों की तैनाती की गई है साथ ही सीसीटीवी कैमरे से निगरानी भी की जाएगी. बता दें कि राज्य के कई हिस्सों से लोग यहां पहुंचने भी लगे हैं. Also Read - भारत में कितने लोगों को मिलती है वीआईपी सुरक्षा? कितना खर्च करती है केंद्र सरकार? मंत्री ने संसद में दी जानकारी

दलित कथाओं के अनुसार, भीमा कोरेगांव की लड़ाई में 500 महार सैनिकों ने 25 हजार पेशवाओं की मजबूत सेना को हराया था. इस लड़ाई में महार सैनिक ब्रिटिश सेना के हिस्सा थे. इस लिहाज से महार और अन्य समुदायों के लाखों लोग 1 जनवरी के दिन विजय स्तंभ पहुंचकर महार सैनिकों के प्रति सम्मान अर्पित करते हैं. उनका मानना ​​है कि ब्रिटिश सेना में महार सैनिकों ने पेशवाओं की कथित जाति के खिलाफ “आजादी के लिए युद्ध” लड़ा था. डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को 1 जनवरी, 1927 को जयस्तंभ का दौरा करने के लिए जाना जाता है, जहां उन्होंने बाद में अधिनियमित एक ब्रिटिश नीति के खिलाफ एक भाषण दिया था, जिसने ब्रिटिश सेना में महारों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था. जैसे ही जयस्तंभ अम्बेडकरवादी आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बन गया, हर साल 1 जनवरी को युद्ध स्मारक पर जाने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई. Also Read - दिल्‍ली में ट्रैक्‍टर रैली के हिंसक प्रदर्शन पर अब तक 15 FIR दर्ज, 83 पुलिसकर्मी हुए थे घायल, अब और सुरक्षा बढ़ाई

गौरतलब है कि दो साल पहले इस लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ पर भीमा कोरेगांव इलाके में हिंसा भड़क गई थी. विभिन्न समुदायों के बीच हुई झड़प में एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी. पुलिस ने बताया कि हिंसा के एक साल बाद यानी इस साल लड़ाई की सालगिरह के मौके पर देशभर के से कुल 8 से 10 लाख लोगों ने जयस्तंभ का दौरा किया. इसमें ‘पहली बार आने वाले आगंतुकों’ की संख्या काफी बड़ी है. पुलिस के अनुसार, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी साथ ही किसी तरह की घटना से आसानी से निपटा जा सकता है. Also Read - भीमा कोरेगांव विजय दिवस: जनवरी में इस दिन पूरी तरह बंद रहेगा पुणे-अहमदनगर हाईवे

प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस साल जयस्तंभ के पास सामान्य से ज्यादा लोग पहुंच सकते हैं. इस लिहाज से प्रशासन ने उनके लिए कई तरह की व्यवस्थाएं की हैं. किसी तरह की अनहोनी को टालने के लिए 5 हजार पुलिसकर्मी, 10 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, 30 उप अधीक्षक और 400 पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई है. पुलिस प्रशासन का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो यह संख्या बढ़ाई भी जा सकती है. इस दौरान प्रशासन की तरफ से पार्किंग की भी व्यवस्था की गई है साथ ही सीसीटीवी कैमरे से भी निगरानी की जाएगी.