Bhima Koregaon Case: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा 2018 कोरेगांव-भीमा हिंसा मामले के सिलसिले में गिरफ्तारी के एक दिन बाद, 83 वर्षीय कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को शुक्रवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने 23 अक्टूबर तक जेल भेज दिया। स्वामी को गुरुवार शाम उनके रांची स्थित आवास से हिरासत में लिया गया. उनसे पुणे पुलिस और एनआईए दो बार पूछताछ कर चुकी है. Also Read - दिल्ली की कोर्ट ने मुस्लिम युवाओं की भर्ती मामले में ISIS के 13 सदस्यों को सजा सुनाई

बता दें कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में भीड़ को कथित तौर पर हिंसा के लिये उकसाने के मामले में शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा, दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर हनी बाबू और आदिवासी नेता स्टैन स्वामी समेत आठ लोगों के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल कर दिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. Also Read - NIA के हाथ लगी बड़ी कामयाबी, पश्चिम बंगाल से अलकायदा का एक और आतंकवादी गिरफ्तार

एनआईए की प्रवक्ता एवं पुलिस उप महानिरीक्षक सोनिया नारंग ने कहा कि आरोपपत्र यहां एक अदालत के समक्ष दाखिल किया गया. जांच के दौरान आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया. यह मामला 1 जनवरी 2018 को पुणे के निकट कोरेगांव की जंग की 200वीं वर्षगांठ के जश्न के बाद हिंसा भड़कने से संबंधित है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गए थे. Also Read - केरल, पश्चिम बंगाल से अरेस्‍ट अलकायदा आतंकियों का ये था प्‍लान, पाक हैंडलर से मिल रहे थे आदेश

अन्य जिन लोगों को खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है उनमें गोवा इंस्टीट्यूट ऑफ मैंनेजमेंट के प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े, भीमा-कोरेगांव शौर्य दिन प्रेरणा अभियान समूह की कार्यकर्ता ज्योति जगताप, सागर गोरखे और रमेश गाइचोर शामिल हैं. एनआईए ने आरोप पत्र में मिलिंद तेलतुंबड़े को भी आरोपी बताया है. वह अभी फरार हैं. एनआईए ने इस साल 24 जनवरी को इस मामले की जांच अपने हाथों में ली है.

(इनपुट भाषा)