मुंबई: पुणे के भीमा कोरेगांव से उठी जातीय हिंसा की आग महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में फैलती जा रही है. मंगलवार को मुंबई के उपनगरों थाणे, चेंबूर, मुलुंद तक हिंसक प्रदर्शन हुआ जिसमें बसों पर पथराव और तोड़ फोड़ की गई. इस हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई है. खास बात ये है कि 31 दिसंबर को हुए जिस कार्यक्रम के बाद ये हिंसा भड़की उसमें दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जेएनयू छात्र उमर खालिद सहित कई लोग पहुंचे थे.

इस गांव में 200 साल पहले हुई लड़ाई में महार रेजीमेंट के मारे गए सैनिकों की शहादत को लेकर एक कार्यक्रम रखा गया था. इस मौके पर उनके अलावा कार्यक्रम में जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद, रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला, भीम आर्मी अध्यक्ष विनय रतन सिंह और पूर्व सांसद और डॉ. भीमराव अंबेडकर के पौत्र प्रकाश अंबेडकर भी शामिल थे.

आज भी हिंसा-आगजनी

महाराष्ट्र के पुणे जिले में भीमा कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को लेकर आक्रोश आज भी जारी रहा और प्रदर्शनकारियों ने हार्बर लाइन पर उपनगरीय और स्थानीय ट्रेन सेवाएं बाधित कर दीं. प्रदर्शनकारियों में मुंबई के कई इलाकों में सड़कें अवरूद्ध कर दीं, दुकानें बंद करा दीं और एक टेलीविजन समाचार चैनल के पत्रकार पर हमला भी किया. ताजा घटनाक्रम में मध्य रेलवे ने अपने हार्बर कॉरिडोर पर कुर्ला और वाशी के बीच उपनगरीय सेवाएं निलंबित कर दी और सीएसएमटी-कुर्ला और वाशी-पनवेल खंड के बीच विशेष सेवाएं चला रही है. मध्य रेलवे के सभी स्टेशनों पर इस सेवा की घोषणा की जा रही है.

यह भी पढ़ें: पुणे में 200 साल पहले की जीत के जश्न पर संग्राम, हिंसा और आगजनी

इस हिंसा में मारे गए शख्स की पहचान राहुल पटांगले के रूप में हुई है. मुख्यमंत्री फड़णवीस ने कहा कि युवक की मौत की सीआईडी जांच और कोरेगांव गांव हिंसा के मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन किया जाएगा. उन्होंने मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए मुआवजा देने की भी घोषणा की है.
bhima-protest-2

राहुल का बीजेपी और आरएसएस पर निशाना
वहीं, महाराष्ट्र में भड़की जातीय हिंसा को लेकर राहुल ने बाजेपी और आरएसएस पर निशाना साधा है. मंगलवार शाम ट्वीट कर कहा कि भारत के लिए RSS और बीजेपी का फासीवादी दृष्टिकोण ही यही है कि दलितों को भारतीय समाज में निम्न स्तर पर ही बने रहना चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष ने उना और रोहित वेमुला का जिक्र करते हुए लिखा, ‘उना, रोहित वेमुला और अब भीमा-कोरेगांव प्रतिरोध के सशक्त प्रतीक हैं.’

क्या है कोरेगांव लड़ाई का इतिहास
1 जनवरी 1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी और पेशवा की सेना के बीच युद्ध हुआ था, जिसमें कंपनी की सेना की जीत हुई थी. कंपनी की ओर से महार रेजिमेंट के दलित सैनिक लड़ रहे थे. इन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए पेशवा की बड़ी फौज को हरा दिया था.

दलित सैनिकों की शहादत का जश्न मनाने के दौरान भड़की हिंसा
दलित समुदाय के लोग इस दिन को शौर्य दिवस के तौर पर मनाने के लिए युद्ध स्मारक ‘जय स्तम्भ’ की ओर बढ़ रहे थे. इसी दौरान ग्रामीणों और शौर्य दिवस मनाने पहुंचे लोगों में भिड़ंत हो गई. बताया जा रहा है कुछ लोग पहले से ही ब्रिटिश जीत का जश्न मनाने का विरोध कर रहे थे. लेकिन दलित नेता ब्रिटिश जीत का जश्न नहीं मनाते हैं. बल्कि उन सैनिकों की बहादुरी का जश्न मनाते हैं जो ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लड़े थे.