पुणे/मुंबई: भीमा कोरेगांव हिंसा और नक्सल कनेक्शन के मामले में गिरफ्तार पांच वामपंथी विचारक और सामाजिक कार्यकर्ताओं में से तीन को सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुणे पुलिस ने उनके घर वापस भेज दिया है. मामले के जांच अधिकारी पुणे के सहायक पुलिस आयुक्त शिवाजी पवार ने कहा कि तीनों कार्यकर्ताओं को कल देर रात उनके शहरों में भेजने का इंतजाम किया गया. तीनों अपने घर पहुंच गए हैं. उन्होंने कहा कि तीनों कार्यकर्ताओं को नजरबंद रखा जाएगा. वहीँ, परिजनों ने कार्यकर्ताओं का स्वागत किया. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

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उन्होंने कहा, ‘संबंधित शहरों में स्थानीय पुलिस के अलावा हमारे अपने पुलिस अधिकारी और कर्मी भी उनके आवासों पर तैनात किए गए हैं.’ तेलगू कवि और लेखक वरवर राव आज सुबह हैदराबाद स्थित अपने घर पहुंचे जबकि वर्नोन गोन्साल्विज और अरूण फरेरा सड़क मार्ग से मुंबई स्थित अपने घर गए. गोन्साल्विज आज सुबह करीब साढ़े सात बजे मुंबई के अंधेरी स्थित अपने घर पहुंचे. उनकी पत्नी और वकील सुसैन अब्राहम ने कहा, वर्नोन सुरक्षित घर पहुंच गए हैं और हमने उनका स्वागत किया. उन्होंने कहा, हम पुलिस से अनुरोध करते हैं कि वह हमारी हाउसिंग सोसायटी की पूरी सड़क अवरुद्ध ना करे क्योंकि इससे यहां अन्य निवासियों को डर लग सकता है.’ फरेरा को पड़ोसी ठाणे जिले के चराई स्थित उनके आवास पर ले जाया गया. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

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बता दें कि प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने भीमा-कोरेगांव घटना के करीब नौ महीने बाद इन व्यक्तियों को गिरफ्तार करने पर महाराष्ट्र पुलिस से सवाल भी उठाए थे. पीठ ने कहा था कि असहमति लोकतंत्र का सेफ्टी वाल्व है और अगर आप इन सेफ्टी वाल्व की इजाजत नहीं देंगे तो यह फट जाएगा. शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही इन गिरफ्तारियों के खिलाफ इतिहासकार रोमिला थापर और अन्य की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार और राज्य पुलिस को नोटिस जारी किए. याचिकाकर्ताओं में प्रभात पटनायक और देविका जैन भी शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इन कार्यकर्ताओं को अरेस्ट करने पर फटकार लगाते हुए रिमांड पर देने से इनकार कर दिया था.