नई दिल्ली : केंद्रीय सूचना आयोग ने गृह मंत्रालय को पंजाब सरकार को एक आरटीआई आवेदन हस्तांतरित करने को कहा है. इस आरटीआई में सवाल किए गए हैं कि जरनैल सिंह भिंडरावाला को सरकारी दस्तावेजों में किस तरह से वर्णित किया गया है? इस आरटीआई के आवेदनकर्ता ने सरकार से जवाब मांगा है कि भींडरावाला को धार्मिक उपदेशक, अपराधी, आतंकी या अन्य में से क्या माना गया है. आरटीआई आवेदक ने गृह मंत्रालय से यह भी पूछा कि भिंडरावाले के खिलाफ कितनी प्राथमिकियां लंबित हैं. Also Read - पंजाब: शौर्य चक्र से सम्मानित बलविंदर की गोली मार कर हत्या, सरकार ने कुछ समय पहले ही वापस ली थी सुरक्षा

सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने कहा, ‘‘ लोक सूचना अधिकारी को आदेश मिलने के एक हफ्ते के अंदर पंजाब सरकार को आरटीआई आवेदन हस्तांतरित करने का निर्देश दिया जाता है.’’ कानून-व्यवस्था के राज्य का विषय होने के कारण भिंडरावाला के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़ी सूचना पंजाब सरकार के पास होनी चाहिए. Also Read - ED ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की पत्नी के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया

ऑपरेशन ब्लू स्टार
ऑपरेशन ब्लू स्टार भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को अमृतसर (पंजाब, भारत) स्थित हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाला और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था. पंजाब में भिंडरावाला के नेतृत्व में अलगाववादी ताकतें सशक्त हो रही थीं जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था. 1984 में इंदिरा गांधी सरकार में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में सुरक्षाबलों द्वारा मार गिराया गया था. बता दें कि भिंडरावाला को खालिस्तान आंदोलन का चेहरा बताया जाता है. Also Read - यूपी सहित देश के इन 12 राज्यों में सक्रिय है आतंकी संगठन आईएस, सरकार ने संसद में दी जानकारी

दो जून को हर मंदिर साहिब परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने आना शुरु कर दिया था क्योंकि तीन जून को गुरु अरजुन देव का शहीदी दिवस था. उधर जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश को संबोधित किया तो ये स्पष्ट था कि सरकार स्थिति को खासी गंभीरता से देख रही है और भारत सरकार कोई भी कार्रवाई कर सकती है. पंजाब से आने-जाने वाली रेलगाड़ियों और बस सेवाओं पर रोक लग गई, फोन कनेक्शन काट दिए गए और विदेशी मीडिया को राज्य से बाहर कर दिया गया.

भारतीय सैन्य अभियान
तीन जून को भारतीय सेना ने अमृतसर पहुंचकर स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर लिया और शाम के समय शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया. चार जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी ताकि मंदिर में मौजूद मोर्चाबंद चरमपंथियों के हथियारों का अंदाज़ा लगाया जा सके. चरमपंथियों की ओर से इसका इतना तीखा जवाब मिला कि पांच जून को बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों को इस्तेमाल करने का निर्णय किया गया. पांच जून की रात को सेना और सिख लड़ाकों के बीच असली भिड़ंत शुरू हुई.