नई दिल्ली. संसद में आज पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है. इससे पहले सोशल मीडिया साइट टि्वटर पर #BhookampAaneWalaHai टॉपिक ट्रेंड कर रहा है. दरअसल, अविश्वास प्रस्ताव को लेकर ट्रेंड करने वाला यह टॉपिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 2016 में दिए गए एक बयान पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के तंज का नतीजा है. राहुल गांधी ने नोटबंदी (Demonetisation) पर दिए गए अपने एक बयान में कहा था कि अगर संसद में वह इस मुद्दे पर बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा. राहुल के इसी बयान को भाजपा के कई नेताओं ने आज के अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली बहस से जोड़ते हुए ‘भूकंप आने वाला है’ से संबंधित ट्वीट किए हैं. भाजपा नेता राम माधव और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जहां गुरुवार को भूकंप से संबधित ट्वीट किया था. वहीं, भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय और पार्टी के सांसद परवेश साहिब सिंह ने आज राहुल गांधी के वक्तव्य का वीडियो शेयर करते हुए #BhookampAaneWalaHai टॉपिक से ट्वीट किया है. Also Read - PM नरेंद्र मोदी ने संकट के समय लोगों से क्यों की रोशनी करने की अपील, शास्त्रों में है महत्व, रामायण में भी है ये बात

कांग्रेस के 38 मिनट पर कटाक्ष
संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर विभिन्न पार्टियों को चर्चा के लिए समय निर्धारित किया गया है. इसमें भाजपा को जहां 3 घंटे 33 मिनट का समय दिया गया है, वहीं कांग्रेस के सदस्य 38 मिनट तक चर्चा में हिस्सा लेंगे. इस बात पर भी कई टि्वटर यूजर्स ने राहुल गांधी को निशाना बनाते हुए ट्वीट किया है. सोशल मीडिया पर लोग राहुल गांधी के भाषण, उनकी तस्वीरों पर व्यंग्य कर रहे हैं. बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने पूछा है कि अगर 15 मिनट में एक बार भूकंप आता है तो 38 मिनट में कितनी बार भूकंप आएगा. वहीं, तेजिंदर पाल बग्गा का कहना है कि इस भूकंप को रिक्टर स्केल पर नहीं, बल्कि लाफ्टर स्केल पर नाम जाएगा. हालांकि कांग्रेस के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सिर्फ 38 मिनट का समय दिए जाने को लेकर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को बहस के लिए सिर्फ 38 मिनट दिया जाना आश्चर्यजनक है.

कांग्रेस की तरफ से तीन वक्ता
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाली चर्चा के दौरान कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और ज्योतिरादित्य सिंधिया बोलेंगे. वहीं, भाजपा की तरफ से केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, राकेश सिंह, वीरेंद्र सिंह मस्त और अर्जुन राम मेघवाल को बहस में हिस्सा लेना है. अविश्वास प्रस्तवा पर चर्चा से पहले ही देशभर की निगाहें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हैं. दरअसल, विपक्ष लोकसभा में लाए गए इस प्रस्ताव को न सिर्फ राजग सरकार और भाजपा पर दबाव की रणनीति के तौर पर देख रहा है, बल्कि यह प्रस्तवा अगले वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव से पहले विपक्षी पार्टियों के सामूहिक शक्ति प्रदर्शन के बतौर भी देखा जा रहा है. हालांकि राजग सरकार के पास सदन में पर्याप्त बहुमत है, इसलिए सरकार को किसी तरह का खतरा नहीं है. लेकिन पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर राहुल गांधी संसद में क्या बोलेंगे.