अक्सर निगेटिव खबरों के लिए चर्चा में रहने वाला बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से एक अच्छी ख़बर आई है. विश्वविद्यालय की साइंस फ़ैकल्टी में प्रोफ़ेसर और कामकाजी महिला हॉस्टल की वार्डन प्रोफेसर मधु तापड़िया ने हॉस्टल में ही एक रीडिंग कॉर्नर की शुरुआत करवाई है. इसका नाम ‘ज्ञान गंगोत्री’ है. ख़ास बात यह है कि ‘ज्ञान गंगोत्री’ लड़कियों के लिए 24 घंटे खुला रहता है. यहां लड़कियों के पढ़ने के लिए अलग-अलग क्षेत्र की किताबों के साथ-साथ नेशनल-इंटरनेशल मैग्ज़ीन भी उपलब्ध कराई जाएंगी. विश्वविद्यालय में ये अपने तरह का पहला स्टडी कॉर्नर है. Also Read - Coronavirus: घर में कैसे बनाए सेनिटाइजर? IIT बीएचयू ने बताया ये आसान तरीका

इंडिया डॉट कॉम से बातचीत में प्रोफेसर मधु का कहना है कि वह बहुत दिनों से ये सोच रही थीं कि हॉस्टल में एक कॉर्नर होना चाहिए, जहां बच्चे रिलेक्स कर सकें. चाहे वह किसी भी फ़ॉर्म में हों. चूंकि ये हॉस्टल सेल्फ़ फाइनेंस्ड है, तो यहां रहने वाले लोग बहुत ज़्यादा अफ़ॉर्ड नहीं कर सकते. इस बीच उन्हें याद आया कि वाइस चांसलर के ऑफ़िस में मैग्ज़ीन पड़ी रहती हैं. वहां नई मैग्ज़ीन्स आती हैं, तो पुरानी रिप्लेस कर दी जाती हैं. ऐसे में मासिक और साप्ताहिक पत्रिकाओं को लेकर उन्होंने वहां बात की. उनसे कहा कि वे हफ़्ते-दस दिन के पहले उन्हें ये मैग्ज़ीन दे दें. इसके लिए उन्होंने वाइस चांसलर से भी परमिशन ले ली. Also Read - 3500 Year Old Shivling: बनारस के पास खुदाई में BHU को मिला हजारों साल पुराना सफेद शिवलिंग, मूर्तियां

प्रोफेसर मधु.

वह कहती हैं कि रीडिंग कॉर्नर के अपने कॉन्सेप्ट में वह एक स्टेप और आगे बढ़ गईं. लेकिन, उन्हें ये मैग्ज़ीन पर्याप्त नहीं लग रही थीं. इस दौरान उन्हें याद आया कि अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के बहुत सारे प्रोफ़ेसर्स हैं, जिनके पास कई ज़रूरी किताबें हैं और बातचीत में उन्होंने बताया है कि इन किताबों को लेकर उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा. उन्होंने उनसे बात की और कहा कि किताबें ‘ज्ञान गंगोत्री’ को डोनेट कर दें. इस तरह कई टीचर्स ने उन्हें किताबें दीं. अब ये स्टडी कॉर्नर एक संपन्न कॉर्नर बन गया है. यहां अलग-अलग ज़ॉनर की किताबें हैं, जिसे लोग अपने इंटरेस्ट के हिसाब से पढ़ सकते हैं. Also Read - पीएम मोदी पहुंचे वाराणसी, 1254 करोड़ की 50 परियोजनाओं की देंगे सौगात

प्रो. मधु कहती हैं, “साइंस से होने के बावजूद मुझे साहित्य, काव्य, इतिहास से जुड़ी किताबों में इंटरेस्ट रहा है. बातचीत के दौरान हॉस्टल के भी बहुत सारे लोगों ने कहा कि सुविधाएं नहीं होने की वजह से वे इनसे जुड़ नहीं पा रही हैं. इसे देखते हुए हमने यहां रोचक उपन्यास, बायोग्राफी, काव्य-संस्कृति से जुड़ी दूसरी किताबें भी रखीं.”

बता दें कि बीएचयू का ये हॉस्टल पूरी तरह से सेल्फ़ फाइनेंस है. यहां तक कि हॉस्टल डेवलपमेंट फ़ंड का जो सपोर्ट विश्वविद्यालय को देना होता है, वह भी नहीं मिलता है. स्टाफ़ की सैलरी या डे टू डे का जो भी ख़र्चा है, वह रेंट से ही आता है. यहां हॉस्टल के अलॉटमेंट के लिए डीन ऑफ़ स्टूडेंट्स के पास कुछ सीटें होती हैं. हालांकि, बाकी सीटें फ़र्स्ट कम फ़र्स्ट सर्व बेसिस पर दी जाती है.

इस हॉस्टल में बीए, बीएससी, एमएसी, कॉमर्स, लॉ, मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, एजुकेशन किसी भी फ़ैकल्टी के स्टूडेंट्स रह सकते हैं. यहां तक कि असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, मेडिकल अफ़सर, नर्स भी रहती हैं. “मिक्सड पॉपुलेशन होने की वजह से हमने किताबें भी हर जॉनर की मंगाई. इससे जिसे जिस क्षेत्र में रुची हो, उस हिसाब से उसे किताब मिलेगी.”