नई दिल्ली. ‘2+2 डायलॉग’ स्थगित होने पर उठे विवाद के बीच विदेश मंत्रालय ने आज कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध काफी प्रगाढ़ हैं और दोनों देश अपने संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध हैं. ईरान से तेल आयात को शून्य के स्तर पर लाने को लेकर अमेरिका के बयान के बीच विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेल आयात के बारे में अमेरिका का बयान भारत केंद्रित नहीं है. भारत यह सुनिश्चित करेगा कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा किसी भी तरह से प्रभावित नहीं हों. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा कि हम अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाएंगे जिसमें सभी पक्षकारों के साथ चर्चा शामिल है. ईरान के साथ तेल आयात शून्य के स्तर तक लाने के बारे में एक सवाल के जवाब में कुमार ने कहा कि इस बारे में अमेरिका का बयान भारत केंद्रित नहीं, बल्कि यह पूरी दुनिया पर लागू होता है. उन्होंने कहा कि ईरान भारत का पारंपरिक सहयोगी है जिसके साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध हैं. Also Read - PM नरेंद्र मोदी का नया रिकॉर्ड, सबसे लंबे समय तक रहने वाले पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने

निकी हेली के बयान पर टालमटोल
यह पूछे जाने पर कि संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत निकी हेली ने ईरान को दुनिया के लिए खतरा बताया है, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने यह बयान नहीं देखा है. उन्होंने कहा कि ईरान के विषय में भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. ‘2+2 डायलॉग’ स्थगित होने को ईरान के तेल आयात से जुड़े होने के बारे में एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने आज सुबह ही बयान जारी कर दिया है. इसके बाद अब इस बारे में अटकलों पर विराम लग जाना चाहिए. रवीश कुमार ने कहा, ‘उनके बयान (अमेरिकी बयान) और हमारे बयान के बारे में मीडिया के कुछ वर्गों में अटकलों पर विराम लगाया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अपने संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध है. हमारे संबंध काफी प्रगाढ़ हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वार्ता के बारे में दोनों पक्ष मिलकर उपयुक्त तिथि को अंतिम रूप देंगे जो भारत या अमेरिका में हो सकता है.

2+2 डायलॉग पर राजी हुआ अमेरिका
उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और अमेरिका के उनके समकक्ष माइक पोम्पिओ स्थगित किए गए ‘2+2 डायलॉग’ को आपसी सहमति से सुविधाजनक समय और स्थान पर जल्द से जल्द फिर से आयोजित करने पर राजी हो गए. इससे पहले सुषमा और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का छह जुलाई को पोम्पिओ और अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस के साथ बैठक में भाग लेने के लिए अमेरिका आने का कार्यक्रम था. लेकिन पोम्पिओ ने कल सुषमा को फोन कर ‘अपरिहार्य कारणों’ से वार्ता टालने के लिए ‘खेद और निराशा’ जताई थी.

पोम्पिओ ने दोनों देशों के मजबूत संबंध पर दिया जोर
अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने आज बताया कि फोन पर बातचीत के दौरान पोम्पिओ ने अमेरिका-भारत सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की. साथ ही कहा कि ट्रंप प्रशासन के लिए भारत ‘बड़ी प्राथमिकता’ है. प्रवक्ता ने कहा, ‘पोम्पिओ और सुषमा इस बात पर सहमत हो गए कि आपसी सहमति से सुविधाजनक समय और स्थान पर जल्द से जल्द 2+2 डायलॉग फिर से आयोजित कराया जाए.’ वार्ता स्थगित करने के पीछे के कारणों के बारे में कुछ नहीं बताते हुए प्रवक्ता ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के लिए अमेरिका-भारत संबंध ‘बड़ी प्राथमिकता’ है और वह साझेदारी को ‘मजबूत’ बनाने के लिए उत्साहित हैं.