यूपी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन.एच.एम) के तहत करीब 5 हजार स्टाफ नर्स और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) की भर्ती में गड़बड़ी के सबूत मिले हैं. सबतों के तहत तय मानकों से कम नंबर पाने वालों की भी भर्ती की गई है. कई मामलों में तो 90 में से 3 नंबर पाने वालों को भी नौकरी दे दी गई. वहीं, 90 में से 64 नंबर पाने वाले भी घोषित कर दिए गए. बता दें, ये मामला परिवार कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के विभाग से जुड़ा हुआ है. Also Read - यूपी में 31,661 असिस्‍टेंट टीचर्स की वैकेंसी की रिक्रूटमेंट प्रोसेस एक हफ्ते में पूरी होगी

दरअसल सरकार ने उत्तर प्रदेश के कई जिलों नेशनल हेल्मेंथ मिशन के तहत एएनएम और हेल्थ स्टाफ नर्स की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था. इसके जरिए 5000 भर्तियां होनी थी, लेकिन इन भर्तियों के रिजल्ट में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं. किसी जिले में 90 मे से 3 नम्बर पाने वाले लोगों को भर्ती कर लिया गया तो किसी अन्य जिले में 90 में से 64 नंबर पाने वाले अभ्यर्थी को भी भर्ती नहीं किया गया. Also Read - Unlock-4: बिहार से नेपाल, यूपी और झारखंड के लिए जल्द खुलेंगी बसें, हो रही तैयारी

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यह भर्तियां लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर की गई हैं. महिला कल्याण और स्वास्थ्य विभाग की तरफ से की गयी इन भर्तियों में अभ्यर्थियों ने गड़बड़ियों के आरोप सरकार पर लगाए हैं. अगर सरकारी वेबसाइट पर देखा जाए तो कई लोगों के रिजल्ट्स ऐसे हैं, जिससे उन्हें पासिंग मार्क्स भी नहीं मिले हैं. बावजूद इसके उन्हें भर्ती के लिए ठीक मान लिया गया, जबकि कई जिलों में ज्यादा नंबर पाने वाले लोग भी पीछे रह गए.

इस मामले के उजागर होने के बाद मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा, ‘सरकार ने पारदर्शी तरीके से भर्ती कराने के लिये हर जिले मे अलग मेरिट लिस्ट बनवाई है, इसलिए ऐसा हुआ है. जैसे कि किसी जिले में 100 लोग परीक्षा में बैठे और उसमें किसी ने अध‍िक्तम 10 अंक ही पाए तो उसकी भर्ती हो गई. लेकिन अगर किसी दूसरे शहर मे परीक्षार्थी ने पचास नम्बर पाए, लेकिन उससे भी ज्यादा अंक पाने वाले लोग हैं तो उसकी भर्ती नहीं हुई. हर शहर की अलग मेरिट लिस्ट बनी है.’

विभाग ने 22 जुलाई 2017 को विज्ञापन देकर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी. इसके लिए लिखित परीक्षा 5 नवंबर को पूरे प्रदेश में आयोजित की गई. इस लिखित परीक्षा का परिणाम 22 दिसम्बर 2017 को घोषित किया गया.

एनएचएम के एमडी पंकज कुमार का कहना है कि भर्ती में पारदर्शी तरीका अपनाया गया है. जिलेवार कटऑफ लिस्ट न जारी करने की वजह से भ्रम पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि अभी भर्ती में स्क्रीनिंग बाकी है. स्टाफ नर्स और एएनएम परीक्षा का यह अंतिम रिजल्ट नहीं है. उन्होंने कहा कि कम नंबर पाने वालों की अभी स्क्रीनिंग होगी. वहीं रिजल्ट में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद से अभ्यर्थियों में भारी रोष है.

यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि दरअसल ये भर्तियां जिलेवार हुई और उन जिलों में खाली पदों के हिसाब से हुई. अब ऐसे में किसी जिले में कटऑफ लिस्ट हाई चली गई और वहां कम पद थे तो जितने लोग उसके दायरे में आए उन्हें भर्ती किया गया और जिस जिले में कटऑफ लिस्ट कम रही और वहां पद ज्यादा थे तो कम नंबर वाले को भी सलेक्ट किया गया.इसमें गड़बड़ी जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा ये सारी भर्तियां ऑनलाइन हुई हैं ऐसे में इनमें गड़बडि़यों की गुंजाइश नहीं है. उनके मुताबिक जहां जितने पद थे उतने लोगों को ही मौका दिया जा सकता था और अगर वहां कट ऑफ कम हो गया तो कम नंबर वाले को भी मौका मिल गया.