नई दिल्ली. केंद्र सरकार इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में बदलाव करने जा रही है. बताया जा रहा है कि इससे अधूरे हाउसिंग प्रोजेक्ट के खरीदारों को मदद मिलेगी. यही नहीं खरीदारों को बैंकों के बराबर फाइनेंशियल क्रेडिटर का दर्जा भी मिलेगा. बताया जा रहा है कि सरकार इसे अध्यादेश के जरिए लाने की तैयारी में है. Also Read - कोलकाता मेट्रो को सौगात: चीन निर्मित नई बोगियों का आयात शुरू, सुरक्षा मंजूरी का इंतजार

बता दें कि कई कंपनियों ने खुद को दिवालिया घोषित कर रखा है. ऐसे में इनके हाउसिंग प्रोजेक्ट में हजारों लोगों के पैसे फंसे हैं. केंद्र सरकार दिवालिया कानून में संसोधन के लिए 14 सदस्यों की समिति बनाई थी. इसकी रिपोर्ट आ चुकी है और सरकार इस पर आगे की कार्रवाई करने जा रही है. समिति ने घर खरीदने वालों को परेशानियों से दूर रखने और बैंकों के लिए रिकवरी आसान करने संबंध सुझाव दिए थे.

वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत घर खरीदारों को ‘ऑपरेशनल क्रेडिटर’ का दर्जा हासिल है. अभी तक डेवलपर डिफॉल्ट हो जाता है तो कंपनी की नीलामी से जो पैसे मिलते हैं उसमें खरीदार का हक सबसे अंतिम में आता है. नया नियम लागू हो जाने के बाद बैंकों की तरह खरीदार भी अपने पैसे की वापसी के लिए डेवलपर के खिलाफ दिवालिया कार्रवाई शुरू कर सकेंगे. ऐसे में उन्हें घर खरीदने के लिए दिए गए पैसे जल्दी मिल सकेंगे.

फ्लैट खरीदारों को बैंकों के समान वित्तीय कर्जदाता माना गया
कानून में प्रस्तावित नये संशोधन में फ्लैट खरीदारों को बैंकों के समान ही ‘वित्तीय कर्जदाता’ माना गया है ताकि इस क्षेत्र की कर्ज में फंसी कंपनियों के मामले के दिवाला कानून के तहत समाधान में मकान के लिए पैसा जमा कराने वाले खरीदारों को भी वित्तीय रिण देने वालों (बैंकों और वित्तीय संस्थाओं) की तरह ही समझा जाए. आईबीसी कानून में ताजा संशोधन का प्रस्ताव इसमें नई धारा 29 ए को जोड़े जाने के ठीक एक माह बाद आया है. पिछले साल नवंबर में आईबीसी संहिता में संभावित बोलीदाताओं की अयोग्यता को लेकर नये मानदंड जोड़े गये थे.

कानून में ताजा संशोधन सरकार द्वारा इस संबंध में सिफारिशें देने के लिये गठित 14 सदस्यी समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं. समिति ने पिछले महीने ही मकान खरीदने वालों की चिंताओं और कर्जदाताओं के लिये वसूली को आसान बनाने के बारे में सुझाव दिये थे. केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा, ‘ यह नया विधेयक है… मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी.’ हालांकि उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुये विधेयक का ब्यौरा देने से इनकार किया.

अध्यादेश ला रही सरकार
मंत्रिमंडल ने समिति की सिफारिशों के अनुरूप मकान खरीदारों को राहत पहुंचाने के लिये क्या कुछ उपायों को मंजूरी दी है ? इस सवाल के जवाब में प्रसाद ने कहा , ‘‘ कोई भी अध्यादेश जब तक राष्ट्रपति मंजूरी नहीं देते हैं , इसके बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा जा सकता है. ’’

दिवाला कानून पर गठित समिति ने पिछले महीने ही कारपोरेट कार्य मंत्रालय को दी गई अपनी सिफारिश में कहा है कि रीयल एस्टेट डेवलपर की परियोजनाओं में मकान खरीदने वाले ग्राहकों को भी बैंकों की तरह वित्तीय कर्जदाता की श्रेणी में माना जाना चाहिये. दिवाला समाधान प्रक्रिया में उनकी भी बराबर की भागीदारी होनी चाहिये.

समिति ने सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी आईबीसी कानून के तहत राहत पहुंचाने का सुझाव दिया है. आईबीसी में संशोधन वाले प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जैसे ही मंजूरी देंगे दिवाला प्रक्रिया का सामना कर रहे जेपी इंफ्राटेक जैसी कंपनियों की परियोजनाओं में घर खरीदारों की ताकत बढ़ जाएगी. अधूरी परियोजनाओं के कारण इन कंपनियों की परियोजनाओं में धन जमा करा चुके घर खरीदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

(इनपुट-भाषा)