आबादी में EBC सबसे ज्यादा, लेकिन कुर्मी-कुशवाहा डिसाइडिंग फैक्टर, समझिए क्या कहते हैं बिहार के जातीय समीकरण

Bihar Elections Cast Equation: बिहार सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जाति सर्वेक्षण (Caste Survey) कराया था. सर्वे का पहला फेज 7 जनवरी से 21 जनवरी के बीच और दूसरा फेज 14 अप्रैल से 7 अगस्त तक चला था. इस दौरान 2 करोड़ 83 लाख 44 हजार 107 घरों का सर्वे हुआ था. (सभी आंकड़े कास्ट सर्वे से लिए गए हैं.)

Published date india.com Published: October 17, 2025 3:42 PM IST
आबादी में EBC सबसे ज्यादा, लेकिन कुर्मी-कुशवाहा डिसाइडिंग फैक्टर, समझिए क्या कहते हैं बिहार के जातीय समीकरण
चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में कुल 7 करोड़ 43 लाख वोटर्स हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर फिलहाल नॉमिनेशन का प्रोसेस चल रह है. हर राजनीतिक दल और उम्मीदवार वोटर्स को साधने की कोशिश में लगे हैं. मुकाबला भले ही NDA (BJP, JDU, LJPR और HAM) और महागठबंधन (RJD और कांग्रेस+) के बीच हो, लेकिन ये हकीकत है कि बिहार की राजनीति में जातिगत समीकरण (Caste Calculation) हमेशा से ही एक डिसाइडिंग फैक्टर रहा है. इस बात की झलक BJP, JDU, RJD, LJP (R) और कांग्रेस की कैंडिडेट लिस्ट में भी देखने को मिली है. हर पार्टी ने जातीय समीकरण का ध्यान रखते हुए ही खास सीट पर खास समुदाय के कैंडिडेट को मौका दिया है.

इसका मतलब ये भी है कि मौजूदा समय में बिहार चुनाव में कोई भी पार्टी या गठबंधन सिर्फ एक जाति समूह के भरोसे बहुमत हासिल नहीं कर सकता. सत्ता तक पहुंचने के लिए जहां अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और महादलित समुदाय का साथ चाहिए. वहीं, अगड़ी जातियों और मुस्लिमों का वोट भी जरूरी है.

आइए समझते हैं बिहार के चुनाव में क्या कहते हैं जातीय समीकरण? किस क्षेत्र में किस समुदाय के ज्यादा वोटर्स? कौन किस पार्टी के साथ:-

कब हुआ था कास्ट सर्वे?
बिहार सरकार ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जाति सर्वेक्षण (Caste Survey) कराया था. सर्वे का पहला फेज 7 जनवरी से 21 जनवरी के बीच और दूसरा फेज 14 अप्रैल से 7 अगस्त तक चला था. इस दौरान 2 करोड़ 83 लाख 44 हजार 107 घरों का सर्वे हुआ था. नीतीश सरकार ने 2 अक्टूबर 2023 को जाति सर्वे के आंकड़े जारी किए थे.

कास्ट सर्वे के मुताबिक, बिहार में कुल 203 नोटिफाइड जातियां हैं. सर्वे में हिंदुओं की 4 जातियों- ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और भूमिहार को जनरल कैटेगरी में रखा गया. मुसलमानों की 3 जातियों शेख, पठान और सैयद को जनरल कैटेगरी में रखा गया.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

बिहार में कितने हिंदू सवर्ण?
बिहार की कुल आबादी में हिंदू सवर्ण जातियों (ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ) की भागीदारी करीब 15.5% है. कई दशक पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की राजनीति के उभार से पहले ये जातियां बिहार की सत्ता और प्रशासन में प्रमुखता से रही हैं. इन्हें ही सत्ता का मुख्य सुख भोगने वाला वर्ग माना जाता था. लेकिन, ये वोटर्स राजनीतिक रूप से इतने संगठित हैं कि किसी भी पार्टी की जीत या हार में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

राज्य में यादवों की आबादी?
बिहार की राजनीति में यादव वोट बेहद अहमियत रखते हैं. इनकी आबादी 14.3% है. यह बड़ा वोट बैंक लंबे समय से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ मजबूती से जुड़ा रहा है. यानी ये RJD के कोर वोटर्स हैं. इन वोटर्स का सपोर्ट RJD के सहयोगी दलों को भी रहता है.

मुस्लिम आबादी?
बिहार की कुल आबादी में मुस्लिमों की भागीदारी करीब 17.7% है. यह वर्ग राज्य के चुनावों में एक निर्णायक शक्ति रखता है. वैसे तो मुस्लिम समुदाय सामाजिक रूप से अपर कास्ट, पिछड़ा वर्ग (BC), अति पिछड़ा वर्ग (EBC) और अनुसूचित जाति (SC) जैसे अलग-अलग समूहों में बंटा हुआ है. लेकिन, ज्यादातर मुस्लिम OBC और EBC वर्ग में आते हैं. बावजूद इसके ये मतदाता चुनाव के दौरान एक समुदाय की तरह वोट करते हैं.

पारंपरिक रूप से इस समुदाय का झुकाव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व वाले महागठबंधन की ओर रहा है. मुस्लिम वोटों (M) के साथ मिलकर यह यादव (Y) वोट बैंक ‘M-Y समीकरण’ बनाता है, जो चुनावी लड़ाई में RJD गठबंधन की जीत काफी हद तक पक्की कर देते हैं.

कुर्मी और कुशवाहा
बिहार की राजनीति में कुर्मी और कुशवाहा जातियों को एक शब्द में ‘लव-कुश समीकरण’ कहा जाता है. राज्य की कुल आबादी में इन दोनों जातियों की हिस्सेदारी 7.1% है. इसमें कुशवाहा का शेयर 4.2% और कुर्मी का शेयर 2.8% हैं. यादवों की तरह ये दोनों जातियां भी अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में आती हैं. कुशवाहा जाति के बड़े नेताओं में उपेंद्र कुशवाहा आते हैं. पहले कुर्मी और कुशवाहा वोटर्स RJD के साथ थें. अब BJP इस वोट बैंक को साधने की कोशिश में है. मौजूदा डिप्टी CM सम्राट चौधरी कुशवाहा समाज से आते हैं.

पासवान-दुसाध
बिहार में पासवान और दुसाध जातियां दलित समुदाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. ये पारंपरिक रूप से रामविलास पासवान के प्रति वफादार रही हैं. LJP की कमान अब रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान के हाथों में है. पासवान-दुसाध वोट बैंक किसी भी गठबंधन के लिए जीत-हार का अंतर तय करने की क्षमता रखता है.

रविदास
बिहार में रविदास समुदाय की आबादी 5% है, जो पासवान समुदाय के लगभग बराबर है. इनके वोट अलग-अलग दलों में बंटते रहे हैं. ये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) (CPI-ML), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को समर्थन देते रहे हैं. कई विधानसभा क्षेत्रों में ये राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके सहयोगियों का भी समर्थन करते हैं.

मुसहर
बिहार में मुसहर समुदाय अनुसूचित जातियों (SC) में से एक है और इसे सबसे गरीब और वंचित समुदायों में गिना जाता है. इनकी आबादी करीब 3.1 फीसदी है. यह समुदाय पारंपरिक रूप से अपने सबसे बड़े और प्रभावशाली नेता जीतन राम मांझी का खुलकर समर्थन करता है. मांझी की पार्टी (HAM) जिस भी गठबंधन में रहती है, मुसहर वोट बड़ी संख्या में उसी ओर जाते हैं.

वैश्य
बिहार में वैश्य समुदाय की कुल आबादी 13.1% है. यह समुदाय मुख्य रूप से बिजनेस से जुड़ा हुआ है. शहरों में रहने वाले और आर्थिक रूप से संपन्न वैश्य पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मजबूत समर्थक रहे हैं.

बिहार में कितनी है पिछड़ी जातियों की आबादी
अगर हम बिहार की आबादी देखें, तो पिछड़ा वर्ग की आबादी करीब 27.12%, अति पिछड़ा वर्ग की आबादी करीब 36.01%, अनुसूचित जाति की 19.65%, अनुसूचित जनजाति की 1.68% और अनारक्षित वर्ग की आबादी करीब 15.52% है.

पहले फेज में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले फेज में 6 नवंबर को 18 जिलों की कुल 121 सीटों पर वोटिंग होनी है. इन जिलों में गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया, मुंगेर, बेगूसराय, लखीसराय, शेखपुरा, नालंदा, पटना, भोजपुर और बक्सर शामिल है.

दूसरे फेज में 20 जिलों की 122 सीटों पर डाले जाएंगे वोट
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे फेज यानी 11 नवंबर को 20 जिलों की 122 सीटों पर वोट डाले जाने हैं. इन जिलों में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, सुपौल, मधुबनी, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, नवादा, गया, जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर शामिल है.

NDA जहां मजबूत, वहीं पहले वोटिंग
पहले फेज की 121 सीटों में से 70 सीटें तिरहुत और मिथिलांचल की हैं. इन क्षेत्रों में NDA जहां मजबूत है, वहीं सबसे ज्यादा वोटिंग है. इसमें दरभंगा, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, गोपालगंज, मुंगेर और नालंदा सीट शामिल है. दरभंगा की 10 में से 9, समस्तीपुर की 10 में से 5, नालंदा की 7 में से 6, शेखपुरा की 2 में से 1, मुंगेर की 3 में से 2, खगड़िया की 4 में से 2, मधेपुरा की 4 में से 2 और सहरसा की 4 में से 3 सीटें फिलहाल NDA के पास है. हालांकि, पहले फेज में ही अंग प्रदेश के मुंगेर, शाहाबाद के बक्सर, कोसी के सहरसा, मगध के नालंदा और शेखपुरा में भी वोटिंग होनी है. यहां NDA कुछ खास पोजिशन में नहीं है.

वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव के आंकडों को देखें, तो पहले फेज की 121 में से 59 सीटें NDA और 61 सीटें महागठबंधन के पास हैं. जबकि दूसरे फेज की 122 में से 66 NDA और 49 सीटें महागठबंधन के पास हैं.

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Bihar की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.