दिवाली से पहले ही बिहार की जनता ने नीतीश कुमार को बड़ा गिफ्ट और पीएम नरेंद्र मोदी को बड़ा झटका दिया है। नतीजों से साफ हो गया कि दिल्‍ली के बाद बिहार में भी मोदी का जादू नहीं चला। सबसे ज्‍यादा चौंकाने वाले आंकड़े आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के पक्ष में आ रहे हैं। लालू की पार्टी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। Also Read - पीएम मोदी ने कहा- कोरोना वायरस ने हमारे धर्मों, हमारी सोच पर हमला बोला है, इसे पराजित करने को एकजुट हों

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इस चुनाव में मोदी के गठबंधन की करारी हार हुई है। ऐसे में सवाल है कि ये हार किसकी है नरेंद्र मोदी या अमित शाह? Also Read - कोरोना वायरस के 'इलाज और टीके' के लिए पीएम मोदी ने की फ्रांस के राष्ट्रपति से बात

बता दे कि बिहार की जंग जीतने के लिए बीजेपी ने करीब 850 चुनावी सभाएं की थीं। जबकि उनके मुकाबले में महागठबंधन की ओर से करीब 500 चुनावी सभाएं ही हुई थीं। बीजेपी की 850 चुनावी सभाओं में प्रधानमंत्री से लेकर अमित शाह, सुशील मोदी तक की सभा शामिल है। यह भी पढ़े-Live Update: बीजेपी 61 सीटों पर तो महागठबंधन 176 पर और अन्य 06 आगे चल रहें हैं

प्रधानमंत्री ने कुल 26 सभाएं चुनाव की तारीख के एलान के बाद की। इनमें से 17 सभाएं आखिरी तीन दौर में हुई, तो बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रचार की पूरी कमान अपने हाथ में ले रखी थी. अमित शाह ने 85 सभाएं की। बावजूद इसके नतीजे बेहद ही चौंकानेवाले आये है। जिससे बीजेपी की किरकिरी हो रही है।

दिलचस्प बात ये है कि चुनाव प्रचार के दौरान ये चर्चा जोरों पर रही है कि कोई प्रधानमंत्री किसी विधानसभा चुनाव के प्रचार को लेकर इतनी रैलियां नहीं करते। लेकिन मोदी ने धुआंधार रैलियां की और उनमें रिकार्ड तोड़ लोग भी जुटे। मोदी ऐसा दावा करते भी देखे गए। यह भी पढ़े-बीजेपी की हार के बाद अब आलोचना शुरू

मोदी ने चुनाव में उन मुद्दों को भी उकेरा जिससे सांप्रदायिक वोटों के ध्रुवीकरण के आरोरप लगे, लेकिन नतीजे पार्टी के लिए अच्छे नहीं रहे। जहां-जहां मोदी ने रैलियां की उन इलाकों से भी नतीजे बीजेपी के लिए अच्छे नहीं रहे।

रुझानों का कमोबेश नतीजों में बदलना तय है। ऐसे में नीतीश कुमार का पांचवीं बार बिहार के मुख्‍यमंत्री बनेंगे। विधानसभा चुनाव में मिल रहे भारी बहुमत पर नीतीश कुमार ने बिहार की जनता का धन्‍यवाद किया है। यह भी पढ़े-बिहार में नहीं चला मोदी का जादू, अमित शाह सहित BJP की करारी हार

महागठबंधन में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस शामिल हैं। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सीमाचंल में 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था। रुझानों में वह किसी भी सीट पर आगे नहीं है।

अमित शाह की कोशिश।

अमित शाह ने भी चुनाव प्रचार में अपना दम-खम लगा रखा था। वे भी दावा करते रहे हैं कि नीतीश-लालू को हराना जरूरी है। अमित शाह ने तो यहां तक कहा कि अगर लालू-नीतीश जीते तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे। बावजूद इसके कोई फायदा नही हुआ।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि बिहार चुनाव के नतीजे नफरत की राजनीति करने वालों के मुंह पर तमाचा है। उन्होंने कहा की मैं उम्मीद करता हूं कि इस चुनाव के नतीजों के बाद इनटोलरेंस का महौल खत्म होगा।

केजरीवाल ने कहा कि बिहार का रिजल्ट मोदी के काम का रिफरेंडम है। दिल्ली में जिस तरह केंद्र नाजायज हस्तक्षेप कर रही थी, उम्मीद करते है के वो अब बंद होगा।