
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
Bihar Monsoon Date: बिहार में भीषण गर्मी और उमस के बीच लोगों को अब मानसून का बेसब्री से इंतजार है. केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत होने के बाद राज्य में बारिश को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं. मौसम विभाग के ताजा अनुमान के अनुसार बिहार में मानसून इस बार सामान्य तारीख से कुछ दिन देर से पहुंच सकता है, लेकिन जून के तीसरे सप्ताह में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है.
आमतौर पर बिहार में मानसून 15 जून के आसपास प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसकी गति थोड़ी धीमी बताई जा रही है. मौसम विभाग का अनुमान है कि राज्य में मानसून 18 से 20 जून के बीच दस्तक दे सकता है. इसके साथ ही कई जिलों में प्री-मानसून बारिश और बादलों की आवाजाही भी देखने को मिल सकती है.
बिहार में मानसून का प्रवेश पूर्वी सीमावर्ती इलाकों से होता है. पश्चिम बंगाल की तरफ से आने वाली बंगाल की खाड़ी शाखा सबसे पहले पूर्णिया और किशनगंज जिलों तक पहुंचती है. इसके बाद मानसून धीरे-धीरे पूरे राज्य में फैलता है. इसी वजह से सीमांचल क्षेत्र के जिलों में बारिश की शुरुआत अन्य इलाकों की तुलना में पहले होती है.
मौसम विभाग के संभावित कार्यक्रम के अनुसार पूर्णिया, किशनगंज और आसपास के जिलों में 18 से 20 जून के बीच मानसून सक्रिय हो सकता है. इसके बाद ये भागलपुर, कटिहार, अररिया और अन्य पूर्वी जिलों की तरफ बढ़ेगा. राजधानी पटना और गया में मानसून के लगभग 22 जून तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. वहीं सारण, छपरा, सीवान और उत्तर-पश्चिम बिहार के अन्य जिलों में 24 जून के आसपास अच्छी बारिश शुरू हो सकती है.
मौसम विभाग का कहना है कि अगर मौसम की परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो 25 जून तक पूरे बिहार में मानसून सक्रिय हो जाएगा. इससे तापमान में गिरावट आएगी और लंबे समय से पड़ रही गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है. किसानों के लिए भी ये अवधि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि धान सहित कई फसलों की खेती मानसून पर निर्भर करती है.
दरअसल मानसून की प्रक्रिया समुद्र और जमीन के तापमान के अंतर से शुरू होती है. गर्मियों के दौरान उत्तर भारत की जमीन अत्यधिक गर्म हो जाती है, जिससे कम दबाव का क्षेत्र बनता है. इसके बाद बंगाल की खाड़ी और समुद्री क्षेत्रों से नमी से भरी हवाएं इस तरफ बढ़ती हैं. यही हवाएं बादल बनाकर बारिश लाती हैं और मानसून का स्वरूप ग्रहण करती हैं.
हालांकि, मौसम विभाग ने इस बार पूरे देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना भी जताई है. वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो की स्थिति मानसून को प्रभावित कर सकती है. अगर एल नीनो मजबूत होता है तो कुछ क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से कम रह सकती है.
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