नई दिल्ली. पांच राज्यों में चुनाव प्रचार के बीच बीजेपी ने लोकसभा चुनाव की भी तैयारी शुरू कर दी है. हाल ही में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात कर बिहार में सीटों के बंटवारे पर मुहर लगा दी थी. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि राज्य में कोई बड़ा भाई और कोई छोटा भाई नहीं है. बीजेपी और जेडीयू बराबर-बराबर सीटों पर लडेंगी. अब मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार में 40 सीटों पर फाइनल फॉर्मूला आ गया है. बीजेपी और जेडीयू जहां 17-17 सीटों पर लड़ेंगी, वहीं एलजेपी को 4 और आरएलएसपी 2 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान नहीं हुआ है. Also Read - मुश्किल वक्त में प्रवासी मजदूरों के साथ हर समय खड़ी है समाजवादी पार्टी, हर संभव करेंगे मदद : अखिलेश यादव

बता दें कि बिहार में इस समय लोकसभा की 40 सीटें हैं. साल 2014 के चुनाव में बीजेपी को 22 सीटें मिली थीं. लोजपा को 6 और रालोसपा को 3 सीटें मिली थीं. जेडीयू को 2 सीट हासिल हुई थी, चूंकि उस समय वह एनडीए का हिस्सा नहीं थी. ऐसे में पहले से कयास लग रहे थे कि बीजेपी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य में कोई बड़ा और छोटा भाई नहीं है. बीजेपी और जेडीयू बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. Also Read - राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को झटका, गुजरात के दो और विधायकों ने दिया इस्तीफा

अमित शाह ने ये कहा था
दिल्ली आए नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद अमित शाह ने कहा था, बिहार में कोई बड़ा या छोटा भाई नहीं है. बीजेपी और जेडीयू साथ लड़ेंगी और पासवान और कुशवाहा भी हमारे साथ रहेंगे. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था कि सभी पार्टियां मिलकर सीटों पर बात करेंगी और कौन किस सीट पर लड़ेगा इसका ऐलान कर दिया जाएगा. Also Read - बीजेपी विधायक ने मजदूरों की वापसी के लिए सोनू सूद से मांगी मदद, मिला ऐसा जवाब

उपेंद्र कुशवाहा बना रहे रणनीति
दूसरी तरफ रालोसपा के पास 2014 में तीन सीट थी. वह अपने सीटों के लिए लगातार बार्गेनिंग कर रही है. वह इस बार 3 से ज्यादा सीटें चाहती है. इस मुद्दे पर दबाव बढ़ाने के लिए उपेंद्र कुशवाहा मध्यप्रदेश चुनाव में उतर गए हैं. वहां उन्होंने कई सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है. बताया जा रहा है कि इसके पीछे कारण बीजेपी के ऊपर दबाव बनाना है, जिससे उसे बिहार में सम्मान जनक सीटें मिल जाए.