नई दिल्ली. देश में अक्सर देखा जाता है कि अगर एक बार मामला कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच गया तो फैसला आने में काफी समय लग जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि देश के नागरिक धीमी न्याय व्यवस्था से दुखी हो जाते हैं. ऐसा नही है कि उन्हें न्याय नहीं मिलता है, लेकिन इसमें काफी देरी हो जाती है.

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लेकिन पटना हाईकोर्ट में एक जज ने इस मामले में इतिहास रच दिया. न्यायाधीश मेनन ने महज साढ़े सात महीने के भीतर दाखिल किए गए 63,070 केस में से 62,061 मुकदमों का निष्पादन कर दिया. उनके इस जूनून ने पेंडिग पड़े केस को हल कर दिया. इसके साथ ही उन्होंने एक भी छुट्टी नहीं लेने का इतिहास रच दिया. वहीं, न्यायाधीश ने 300 जमानत संबंधी केस में 289 केस को अंतिम रूप से निपटा दिया.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के इंडियन ज्यूडिशियरी एनुएल रिपोर्ट 2015-16 पर एक नजर डालें तो भारत की अदालतों में 2 करोड़ 81 लाख केस पेंडिंग और निचली अदालतों में 5 हजार जजों की कमी है. आज भी न्याय के लिए बड़ी संख्या में कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं क्योंकि उन्हें भरोसा है कि देर से ही सही उन्हें न्याय के इस मंदिर जरूर इंसाफ मिलेगा.