पटना, 12 फरवरी | पटना उच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक याचिका पर सुनवाई के बाद जनता दल (युनाइटेड) विधायक दल के नवनिर्वाचित नेता नीतीश कुमार को बड़ी राहत देते हुए उन्हें पार्टी विधायक दल का नेता बरकरार रखा है। उच्च न्यायालय ने बुधवार को नीतीश को नया नेता बनाए जाने पर रोक लगा दी थी।  पूर्व महाधिवक्ता एवं बिहार के पूर्व मंत्री पी. के. शाही ने बताया, “मुख्य न्यायाधीश एल. एन. रेड्डी की खंडपीठ ने पहले के आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि नीतीश पार्टी के विधायक दल के नेता पद पर बने रहेंगे।”

शाही ने कहा कि न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इससे पार्टी और नीतीश कुमार के हित पर कोई असर नहीं पड़ेगा।  शाही ने बताया कि सुबह पटना उच्च न्यायालय में नीतीश समर्थक विधायकों ने एक याचिका दायर कर विधायक दल का नया नेता चुने जाने पर दिए गए स्थगनादेश को चुनौती दी थी।  उल्लेखनीय है कि न्यायालय ने बुधवार को नीतीश को विधायक दल का नया नेता चुने जाने पर स्थगनादेश दिया था। मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के करीबी विधायक राजेश्वर राज की अर्जी पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी तय की है।

राज ने पार्टी के अध्यक्ष द्वारा विधायक दल की बैठक बुलाने और बैठक में विधायक दल के नेता चुने जाने पर सवाल उठाया था। इस सप्ताह के प्रारंभ में विधानसभा के प्रभारी सचिव हरेराम मुखिया की ओर से जारी पत्र में कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने नीतीश कुमार को जद (यू) विधायक दल का नया नेता स्वीकार किया है।
उल्लेखनीय है कि उदय नारायण चौधरी पूर्व में ही स्पष्ट कर चुके हैं कि विधानसभा की कार्यवाही कार्य संचालन नियमावली और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चलती है। उन्होंने कहा कि जद (यू) अध्यक्ष का पत्र आया था कि मांझी दल से असंबद्ध हैं। मांझी के स्थाान पर नीतीश कुमार को नया नेता चुना गया है। इसी पत्र के आधार पर विधानसभा सचिवालय द्वारा पत्र जारी किया गया है।