सरकारी बंगले पर घमासान! अगर राबड़ी देवी छोड़ने से कर दें मना, तो क्या जबरन निकाल सकती है बिहार सरकार? जानें क्या कहता है कानून

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में 10 सर्कुलर रोड हमेशा से चर्चा का केंद्र रहा है और अब यह सरकारी आवास फिर सुर्खियों में है. नई आवास सूची जारी होने के बाद राबड़ी देवी को यह बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया है.

Published date india.com Published: November 26, 2025 3:00 PM IST
सरकारी बंगले पर घमासान! अगर राबड़ी देवी छोड़ने से कर दें मना, तो क्या जबरन निकाल सकती है बिहार सरकार? जानें क्या कहता है कानून
फाइल फोटो

Rabri Devi News: पटना का मशहूर 10 सर्कुलर रोड कभी लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की राजनीतिक ताकत का केंद्र माना जाता था. यही वह सरकारी आवास है जहां बिहार की सत्ता के कई बड़े फैसले लिए जाते थे. लेकिन अब यह घर एक नए विवाद के बीच आ गया है. बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि राबड़ी देवी को यह आवास खाली करना होगा, क्योंकि नई सूची के अनुसार यह बंगला अब दूसरे उपयोग के लिए निर्धारित कर दिया गया है.

लालू परिवार को इसके बदले पटना के हार्डिंग रोड पर स्थित हाउस नंबर 39 आवंटित किया गया है. नई सरकार के गठन के बाद मंत्रियों और विधान परिषद सदस्यों के आवासों का पुनर्वितरण किया गया. इस प्रक्रिया में, राबड़ी देवी, जो फिलहाल बिहार विधान परिषद की नेता प्रतिपक्ष हैं, को नया आवास दिया गया है.

राबड़ी देवी के आवास को लेकर घमासान

ऐसे में 10 सर्कुलर रोड पर लालू परिवार का रहना अब नियमों के खिलाफ माना जाएगा, क्योंकि सरकारी व्यवस्था में आवास का कब्जा पद के अनुसार तय होता है. हालांकि इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर राबड़ी देवी यह घर खाली करने से इनकार कर दें, तो आगे क्या होगा? क्या बिहार सरकार उन्हें जबरन बाहर निकाल सकती है? क्या यह सिर्फ एक औपचारिकता है या इसके पीछे सख्त कानूनी प्रक्रिया भी जुड़ी है? जानिए इन सभी सवालों के जवाब.

सरकारी आवास से जुड़े नियम क्या कहते हैं?

किसी भी सरकारी आवास का आवंटन संबंधित पद के आधार पर किया जाता है, चाहे वह मंत्री हो, विधायक, अधिकारी या पूर्व मुख्यमंत्री. जैसे ही व्यक्ति का पद बदलता है, या उसे नया आवास मिल जाता है, पुराने आवास को खाली करना नियमों के अनुसार अनिवार्य हो जाता है.

भारत में ऐसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पब्लिक प्रिमाइसेस (इविक्शन ऑफ अनऑथराइज्ड ऑक्युपेंट्स) एक्ट, 1971 लागू होता है. इस कानून के तहत सबसे पहले व्यक्ति को नोटिस भेजा जाता है. नोटिस में यह बताया जाता है कि वह अब सरकारी घर में रहने के अधिकृत नहीं हैं. निर्धारित समय में जवाब देना या आवास खाली करना जरूरी होता है.

अगर व्यक्ति समय पर घर खाली नहीं करता, तो उसे ‘अनधिकृत कब्जा’ माना जाता है. इसके बाद राज्य सरकार जिला प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार दे देती है, जहां तक कि पुलिस बल की सहायता से आवास खाली करवाया जा सकता है.

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सरकार क्या कदम उठा सकती है?

यदि राबड़ी देवी 10 सर्कुलर रोड का आवास खाली करने से मना कर दें, तो सरकार के पास ये वैध विकल्प मौजूद होंगे. नोटिस भेजना- पहले नोटिस के बाद सरकार एक दूसरा रिमाइंडर नोटिस भी भेज सकती है, जिसमें स्पष्ट समयसीमा तय की जाती है. कब्जा ‘अनधिकृत’ घोषित करना- समयसीमा समाप्त होते ही सरकार इस आवास को ‘अनाधिकृत कब्जा’ मान सकती है.

जिला प्रशासन की कार्रवाई, पुलिस की सहायता

इसके बाद DM और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी कानून के अनुसार बेदखली की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. यदि जरूरत पड़े, तो पुलिस बल की सहायता भी ली जा सकती है, हालांकि VIP व्यक्तियों के मामलों में इसे आखिरी विकल्प माना जाता है.

क्या सरकार जबरन निकाल सकती है?

कानूनी रूप से देखें तो हां, सरकार के पास पूरी शक्तियां हैं कि वह सरकारी आवास खाली करवाए. लेकिन व्यवहारिक रूप से यह उतना सरल नहीं होता. राबड़ी देवी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और राजनीतिक नजरों से यह मामला संवेदनशील भी माना जाएगा. ऐसे में अधिक संभावना यही रहती है कि सरकार बातचीत, नोटिस और औपचारिक प्रक्रियाओं के माध्यम से मामले को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाए.

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