पटना: पदोन्नति में आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद (Lalu Prasad Yadav) ने भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर निशाना साधा है. अपने ट्वीट में लालू ने नसीहत देते हुए कहा कि आरक्षण खत्म करने की बात करने वाले जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? लालू प्रसाद ने सोमवार को ट्वीट में कहा, “आरक्षण खत्म करने की बात करने वाले जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? इसलिए कि जातियां उन्हें श्रेष्ठ बनाती हैं, ऊंचा स्थान देकर बेवजह उन्हें स्वयं पर अहंकार करने का अवसर देती है. हम कहते हैं पहले बीमारी खत्म करो लेकिन वो कहते हैं नहीं पहले इलाज खत्म करो.” शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं हैं. Also Read - Covid-19: जेल से बाहर आए लालू यादव ने ऑनलाइन मीटिंग में आरजेडी वर्कर्स से की बातचीत

कांग्रेस ने BJP को बताया ‘आरक्षण विरोधी’ विचारधारा वाली पार्टी, 16 फरवरी को देशव्यापी प्रदर्शन Also Read - Coronavirus: PM मोदी ने कोविड-19 स्थिति पर इन 4 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से की बात

इधर, लालू प्रसाद के पुत्र और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए हम केंद्र सरकार को चुनौती दी है. तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, “हम राजग सरकार को चुनौती देते है कि तुरंत सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करें या फिर आरक्षण को मूल अधिकार बनाने के लिए मौजूदा संसद सत्र में संविधान में संशोधन करे. अगर ऐसा नहीं होगा तो सड़क से लेकर संसद तक संग्राम होगा.” Also Read - Bihar: DIG पर नशे में लेडी डॉक्‍टर को बार-बार फोन करने का आरोप, CRPF ने दिया जांच का आदेश

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की आरक्षण विरोधी विचारधारा बताते हुए कांग्रेस पार्टी (Congress) 16 फरवरी को देशभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगी. यह घोषणा कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने सोमवार को की. कांग्रेस की विरोध प्रदर्शन की यह घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब इसके पहले सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण का दावा करना मौलिक अधिकार नहीं है. इसके साथ ही अदालत ने कहा था कि कोई भी अदालत किसी राज्य सरकार को यह आदेश नहीं दे सकती कि वह एससी/एसटी को आरक्षण दे.