नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्यण संशोधन विधेयक पेश किया गया जिसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने एवं उनके साथ दुर्व्यवहार करने पर कठोर दंड का प्रावधान किया गया है.

भरण पोषण की रकम में वृद्धि और मानदंड की सिफारिश
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने निचने सदन में यह विधेयक पेश किया. विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि इससे संबंधित अधिनियम पर विचार करने के बाद सचिवों के समूह ने एक समान आयु के वरिष्ठ नागरिकों को सभी फायदा देने, वरिष्ठ नागरिकों के लिए भरण पोषण की रकम में वृद्धि करने और गृह देखरेख सेवाओं के मानकीकरण की सिफारिश की है.

बहू और दामाद की भी जिम्‍मेदारी तय होगी
बिल के अंतर्गत पुत्रवधू और दामाद को बालक की परिभाषा की परिधि में लाने की बात भी कही गई है. इसका मकसद माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों द्वारा भरण पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किए जाने में वृद्धि करना, अस्सी वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के आवेदनों सहित भरण पोषण आवेदनों का शीघ्र निपटान का उपबंध करना है.

वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन
संसोधन बिल में मासिक भरण पोषण की 10 हजार रुपए की ऊपरी सीमा को हटाने की बात कही गई है. इसके तहत प्रत्येक जिले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पुलिस यूनिट का गठन करने तथा प्रत्येक थाने में वरिष्ठ नागरिकों के लिए शीर्ष अधिकारी नियुक्त करने और वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन रखने की बात कही गई है.