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नई दिल्ली, 25 नवंबर | लोकसभा में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम का संशोधित विधेयक मंगलवार को पेश किया गया, जिसके अंतर्गत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के प्रमुख का चयन करने वाली प्रवर समिति के सदस्य के रूप में सदन की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को शामिल किया जाएगा। मौजूदा लोकसभा में कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं है। संवैधानिक प्रावधान के अनुसार, यह दर्जा उस पार्टी को मिलता है, जिसके सदस्यों की संख्या लोकसभा के सदस्यों की संख्या की कम से कम 10 फीसदी होनी चाहिए। Also Read - Hathras Case: हाथरस मामले पर अब होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनाएगा फैसला

इस संशोधन के तहत सीबीआई प्रमुख के चयन के लिए प्रवर समिति में कार्यवाह संख्या (कोरम) की आवश्यकता होगी।  यह विधेयक ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गया है जब सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा का कार्यकाल दो दिसंबर को समाप्त हो रहा है।  विधेयक संशोधन के बाद समिति में प्रधानमंत्री, प्रधान न्यायाधीश और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता शामिल होंगे। Also Read - लंदन की अदालत में नीरव मोदी की जमानत याचिका लगातार सातवीं बार खारिज : सीबीआई

लोक शिकायत राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में कालेधन को लेकर हो रहे हंगामे के बीच यह विधेयक पेश किया। सिंह ने कहा, “यह विधेयक संप्रग सरकार के दौरान लाया गया था और हमने इसमें मामूली बदलाव किया है। बाध्य करने की खबर गलत है।” प्रवर समिति में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी को शामिल किए जाने के मसले पर उन्होंने कहा, “कांग्रेस को शायद यह नहीं पता कि अभी कोई विपक्ष का नेता नहीं है। इसलिए हम हर किसी के साथ चर्चा करेंगे और सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के विकल्प पर फैसला करेंगे कि किसे यह दर्जा मिल सकता है।”

मौजूदा लोकसभा में विपक्ष में सबसे अधिक सीट कांग्रेस के पास (44) है, लेकिन यह आवश्यक 10 फीसदी के आंकड़े से कम है और इसे विपक्षी पार्टी के दर्जे के लिए 11 सांसदों की जरूरत है।  प्रवर समिति में कार्यवाह संख्या पर सिंह ने कहा, “अगर किसी वजह से एक सदस्य उपस्थित नहीं है और सीबीआई एक महत्वपूर्ण संस्था है, इस स्थिति में हम इसे स्थगन की हालत में नहीं रख सकते और न ही सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति को टाल सकते हैं।”