winter session of parliament 2021 संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन लोकसभा द्वारा पारित किए जाने के बाद तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने वाले विधेयक को सोमवार को ही राज्यसभा में पेश किए जाने की संभावना है. सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी. कृषि कानून निरसन विधेयक-2021 को लोकसभा में विचार किये जाने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है. सूत्रों ने कहा कि लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद इसे संसद के उच्च सदन में लाया जाएगा. विधेयक उन तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए है, जिनके खिलाफ किसान एक साल से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. विधेयक के उद्देश्य और कारणों के कथन में कहा गया है कि ‘‘ऐसे में जब हम आजादी का 75वां वर्ष – ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं, तो समय की जरूरत है कि सभी को समावेशी प्रगति और विकास के रास्ते पर साथ लिया जाए.’’Also Read - UP Election 2022: तीसरे व चौथे चरण के लिए उम्मीदवारों के नाम पर BJP में मंथन, चार घंटे चली मीटिंग

इसमें कहा गया है, ‘‘उसके मद्देनजर, उपरोक्त कृषि कानूनों को निरस्त करने का प्रस्ताव है. आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) की धारा 3 की उप-धारा (आईए) को हटाने का भी प्रस्ताव है, जिसे आवश्यक वस्तु अधिनियम (संशोधन) अधिनियम, 2020 (2020 का 22), के तहत डाला गया था.’’ विपक्ष ने मांग की है कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विधेयक को लिया जाए. Also Read - UP Election 2022: आगरा में 6 उम्मीदवारों ने चुनाव के लिये नामांकन किया, एक ट्रांसजेंडर भी मैदान में

भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने, विपक्ष से मुकाबले के लिए पूरी तैयारी से आने को कहा Also Read - Zee Opinion Poll: उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार बनती है तो क्या आप बनेंगे मुख्यमंत्री? जानें हरीश रावत का जवाब...

संसद के शीतकालीन सत्र के लिए रणनीति तैयार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को अपने संसदीय दल की बैठक में पार्टी के सांसदों की अधिक से अधिक संख्या में उपस्थिति पर जोर दिया और उन्हें विपक्ष का मुकाबला करने के लिए पूरी तैयारी के साथ आने को कहा है. सूत्रों ने यह जानकारी दी. सोमवार से शुरू हो रहे सत्र से एक दिन पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की बैठक के दौरान भी सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों ने बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया. इस दौरान, राजग के कुछ सहयोगी दलों ने कृषि कानूनों को वापस लेने के सरकार के फैसले का स्वागत किया. आमतौर पर इन बैठकों में उपस्थित रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी बैठक में शामिल नहीं हुए.

भाजपा संसदीय दल की बैठक की अगुवाई पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने की और इस दौरान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, पीयूष गोयल और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के अलावा केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, स्मृति ईरानी, भूपेंद्र यादव और मुख्तार अब्बास नकवी भी मौजूद रहे. वहीं, राजग की बैठक में विभिन्न गठबंधन सहयोगियों ने हिस्सा लिया, जिनमें जदयू के राजीव रंजन सिंह, अपना दल (एस) की अनुप्रिया पटेल, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) की नेता अगाथा संगमा, अन्नाद्रमुक के ए. नवनीत कृष्णन और आरएलजेपी के पशुपति पारस मौजूद रहे.

सूत्रों ने बताया कि दोनों बैठकों के दौरान जोशी ने सरकार के सभी विधायी कार्यों और विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों से अवगत कराया. सूत्रों ने बताया कि जोशी ने बैठक के दौरान कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि सत्तारूढ़ भाजपा के सदस्य विभिन्न मुद्दों पर बहस और चर्चा के लिए पूरी तैयारी से आएं. अपना दल (एस) नेता आशीष पटेल ने पीटीआई-भाषा को बताया कि पार्टी की नेता और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उत्तर प्रदेश में 69,000 शिक्षकों की खाली सीटों का मुद्दा उठाया और राज्य सरकार से पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती के लिए ओबीसी आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया.

पटेल ने कहा कि अपना दल ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया. एनपीपी नेता अगाथा संगमा ने सरकार से पूर्वोत्तर के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के निर्णय की तर्ज पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को निरस्त करने का आग्रह किया.

(इनपुट भाषा)