
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार सरकार में मंत्री और वरिष्ठ विधायक नितिन नबीन को पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में चुना है. आपको बता दें कि नितिन पांच बार से विधायक हैं और बिहार की बांकीपुर सीट से विधानसभा पहुंचे. बीजेपी ने नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष पद के लिए चुनकर सभी को चौंका दिया है. आइए 5 प्वाइंट में समझते हैं कि भाजपा ने उन्हीं को क्यों यह अहम जिम्मेदारी सौंपी?
लो-प्रोफाइल कार्यकर्ता को चुन क्या संदेश दिया?
नितिन नबीन को चुनकर भाजपा ने यह संदेश दिया है कि पार्टी में कोई भी लो-प्रोफाइल कार्यकर्ता, शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच सकता है. बीजेपी पहले भी मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजनलाल शर्मा, छत्तीसगढ़ में विष्णु साय और ओडिशा में मोहन चरण मांझी जैसे सामान्य चेहरों को मुख्यमंत्री बनाकर यह संदेश दे चुकी है. इस फैसले से देशभर में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और यह संदेश मिलेगा की पार्टी जरूरत के समय अपने लोगों को आगे बढ़ाने से पीछे नहीं हटती. साथ ही यह उन पार्टियों पर हमला है, जहां बड़े पद अक्सर नेताओं के परिवार या करीबी लोगों को ही दिए जाते हैं.
बिहार में पार्टी को मजबूत बनाने पर फोकस
नितिन नबीन की नियुक्ति को बिहार में भाजपा को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है. पार्टी लंबे समय से राज्य में अपने दम पर सरकार बनाने का सपना देख रही है और संगठन को धार देने के लिए यह फैसला अहम माना जा रहा है. इसके साथ ही यह नियुक्ति बीजेपी की युवा नेतृत्व को आगे लाने की नीति का भी हिस्सा है. देश की बड़ी युवा आबादी को साथ जोड़ने के लिए पार्टी लगातार नए और युवा चेहरों को अहम जिम्मेदारियां दे रही है. पिछले चुनावों में युवाओं का झुकाव भाजपा की ओर रहा और अब पार्टी इसी वोटबैंक को स्थायी समर्थन में बदलने की कोशिश कर रही है.
सवर्ण और कायस्थ वोट बैंक को साधने की कोशिश
बीजेपी का यह कदम उसके परंपरागत सवर्ण वोट बैंक को साधने की दिशा में भी अहम संकेत देता है. सवर्ण वर्ग लंबे समय से पार्टी का समर्थन करते आया है और इस नियुक्ति से यह संदेश जाता है कि पार्टी अपने इस आधार को भूली नहीं है. साथ ही नितिन नबीन के कायस्थ समुदाय से आने के कारण बंगाल के प्रभावशाली कायस्थ समाज को साधने की कोशिश भी मानी जा रही है. बंगाल और बिहार के कायस्थ समाज के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते रहे हैं. पश्चिम बंगाल में ज्योति बसु, विधानचंद्र राय जैसे दिग्गज नेता इसी समुदाय से आए हैं. ऐसे में किसी कायस्थ चेहरे को राष्ट्रीय भूमिका देना भाजपा के लिए सांकेतिक और रणनीतिक दोनों ही रूप से फायदेमंद हो सकता है.
अमित शाह से करीबी और संगठनात्मक मजबूती
नितिन नबीन की नियुक्ति के पीछे अमित शाह से उनकी करीबी को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है. क्योंकि संगठन में शाह की भूमिका निर्णायक रहती है, ऐसे में नबीन के आने से संगठन और सरकार के बीच तालमेल और बेहतर हो सकता है. नितिन का लो-प्रोफाइल स्वभाव उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच सहज और स्वीकार्य बनाता है. भाजपा हमेशा से हाईकमान कल्चर के खिलाफ खुद को पेश करती रही है और नबीन इस छवि में पूरी तरह फिट बैठते हैं. उनकी यही खासियत उन्हें एक प्रभावी संगठनकर्ता बनाती है.
बंगाल और पूर्वोत्तर के लिए नई रणनीति
बीजेपी अब सिर्फ हिंदुत्व नहीं, बल्कि जाति, क्षेत्र और परसेप्शन की राजनीति पर भी गहराई से काम कर रही है. पार्टी पर अक्सर उत्तर भारत तक सीमित रहने का आरोप लगता रहा है, जिसे तोड़ने की कोशिश लगातार की जा रही है. बिहार से नितिन नबीन को आगे लाकर पार्टी बंगाल और पूर्वोत्तर तक एक साझा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है. बंगाल में ममता बनर्जी जैसी आक्रामक नेता के मुकाबले नबीन का शालीन और सॉफ्ट चेहरा भाजपा के लिए एक नया विकल्प पेश कर सकता है. छत्तीसगढ़ चुनावों में उनकी संगठनात्मक क्षमता पहले ही साबित हो चुकी है. अब पार्टी को उनसे उम्मीद है कि वे बंगाल और पूर्वोत्तर में भी वही करिश्मा दोहरा सकें.
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