नई दिल्ली. कर्नाटक चुनाव के नतीजे इतने अप्रत्याशित हैं कि सीएम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है. 104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो बनी, लेकिन बहुमत से दूर हो गई. दूसरी तरफ कांग्रेस 78, जेडीएस 38 और 2 निर्दल विधायकों के बल पर कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार बनाने का दावा कर रही है. हालांकि, गवर्नर ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्योता दे दिया और येदियुरप्पा सुबह 9 बजे सीएम पद की शपथ लेंगे. येदियुरप्पा इससे पहले भी दो बार सीएम बन चुके हैं. Also Read - राहुल गांधी ने कहा- अर्थव्यवस्था में लोगों का विश्वास नहीं रहा, PM मोदी में मुश्किल से निपटने की योग्यता नहीं

27 फरवरी 1943 को सामान्य लिंगायत परिवार में जन्मे येदियुरप्पा शुरुआती दौर से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े रहे. साल 1972 में उन्हें शिकारीपुरा तालुका जनसंघ का अध्यक्ष चुना गया. इस दौरान वह एक चावल की मील में बतौर क्लर्क काम भी करते रहें. उन्होंने हार्डवेयर की दुकान भी खोली थी. लेकिन राजनीति में भी संघर्ष करते रहे. इमरजेंसी के दौरान वह जेल गए. Also Read - फिलहाल राहुल गांधी नहीं संभालेंगे पार्टी की कमान, सोनिया कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष बनी रह सकती हैं

बीजेपी ने बनाया प्रदेश अध्यक्ष
साल 1988 में वह वह पहली बार कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष बने. साल 1983 में वह शिकारीपुर से विधानसभा पहुंचे. बता दें कि अभी तक वह 6 बार इसी सीट से चुनाव जीत चुके हैं. साल 1994 और 2004 में वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने.

पहली बार बने डिप्टी सीएम
साल 2006-7 में वह जेडीएस के साथ बीजेपी के हुए एक समझौते में डिप्टी सीएम बने. इस समझौते के मुताबिक, जेडीएस और बीजेपी का 20-20 महीने सीएम बनना था. लेकिन बीजेपी का टर्म आने पर कुमारस्वामी ने समर्थन वापस ले लिया.

पहली बार 7 दिन के लिए बने थे सीएम
येदियुरप्पा 12 नवंबर 2007 को पहली बार सीएम बने थे. लेकिन 19 नवंबर को ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था. साल 2008 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला और येदियुरप्पा एक बार फिर राज्य के सीएम बने. उनका ये मुख्यमंत्रीत्व काल काफी विवादित रहा और तीन साल बाद खनन घोटाले में फंसने पर उनकी कुर्सी चली गई.

लिंगायत फैक्टर का असर
सीएम की कुर्सी जाने के बाद येदियुरप्पा बीजेपी से अलग हो गए. ऐसे में लगा कि वह पूरे लिंगायत फैक्टर के साथ अपने बल पर राजनीति करेंगे. लेकिन, बीजेपी को यह समझते देर नहीं लगी कि येदियुरप्पा के बिना राज्य में उसका कोई जनाधार नही रह जाएगा. ऐसे में 2018 में भी बीजेपी ने उन्हें अपना सीएम पद का उम्मीदवार बनाया. इसका असर चुनावों में दिखा और बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.