नई दिल्ली। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने के लिए आज होने वाली एक बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के 15 मुख्यमंत्री आज यहां एक बैठक में शिरकत करेंगे. भाजपा से जुड़े सूत्रों ने कहा कि आने वाले समय में तीन राज्यों में होने वाले चुनाव और अगले लोकसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के मुख्यमंत्रियों का यह सम्मेलन काफी अहम हो गया है. एक दिन की बैठक के दौरान चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की संभावना है. Also Read - कांग्रेस ने सामूहिक पलायन पर सरकार से पूछे सवाल, कहा- गरीबों की जिंदगी मायने रखती है या नहीं

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इस बैठक में पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भाजपा शासित राज्यों में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगा और मुख्यमंत्रियों को निर्देश देगा. इस साल के आखिर में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं. ये तीनों राज्य भाजपा शासित हैं. मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन का मुख्य एजेंडा सुशासन और गरीब समर्थित नीतियों का संचालन है. साल 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद नियमित तौर पर इस बैठक का आयोजन किया जा रहा है. विभिन्न राज्यों के भाजपाई उपमुख्यमंत्री भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे. Also Read - केजरीवाल ने लोगों को गीता पाठ करने की दी सलाह, कहा- गीता के 18 अध्याय की तरह लॉकडाउन के बचे हैं 18 दिन 

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2014 के चुनाव में भाजपा ने लोकसभा की 80 सीटों में से 71 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था. यही कारण है कि वह अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही. 2014 में मोदी लहर पर सवार बीजेपी महागठबंधन की आहट के चलते मुश्किल में है. लोकसभा के उपचुनावों में विपक्ष के एक साथ आने से बीजेपी को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तक की सीटें गंवानी पड़ी. भाजपा की हार का सिलसिला कैराना लोकसभा के उपचुनाव तक जारी रहा.

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भाजपा के लिए अगले कुछ महीने बेहद अहम

भाजपा के सामने 2018 के बचे महीने बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हैं. साल के अंत तक मध्य प्रदेश, छत्तीस गढ़  और राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं. पार्टी के सामने सत्ता बचाए रखने की चुनौती है. तीनों राज्यों में भाजपा सत्ताविरोधी रुझान से जूझ रही है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पार्टी ने लगातार तीन बार सत्ता पर कब्जा जमाया. वहीं, राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया था. लेकिन इस बार राजस्थान में उसकी हालत बेहद पतली नजर आ रही है. मध्य प्रदेश में भी सीएम शिवराज  चौहान और भाजपा के पक्ष में पहले जैसा माहौल नजर नहीं आ रहा है. किसान आंदोलन ने भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. छत्तीसगढ़ में पिछली बार कांटे की टक्कर हुई थी. इस बार कांग्रेस वापसी के लिए जबरदस्त कोशिश कर रही है.