नई दिल्ली. चार लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं. महाराष्ट्र की भंडारा-गोंदिया और पालघर सीट, नगालैंड लोकसभा सीट और कैराना लोकसभा सीट पर चुनाव हुए. ये चारों सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा था. लेकिन उपचुनाव के नतीजे के बाद इनमें दो सीट बीजेपी के हाथ से चली गई. कैराना और भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट पर बीजेपी की हार हुई है. वहीं, पालघर में उसे जीत मिली है तो नागालैंड लोकसभा सीट पर उसके गठबंधन को जीत मिली है. इस तरह देखें तो चार लोकसभा सीटों में से दो पर उसे हार का सामना करना पड़ा है. Also Read - Satara Lok Sabha bypoll Election 2019 result Live Updates: शिवाजी के वंशज और पर्दे के पीछे पवार के बीच टक्‍कर

ये उपचुनाव के नतीजे बीजेपी को परेशान करने वाले हैं. 11 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में उसे मात्र एक सीट पर जीत मिली है. ऐसे में देखा जाए तो विधानसभा और लोकसभा की 14 सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के खाते में तीन सीटें ही आईं. बीजेपी को सबसे ज्यादा यूपी की कैराना सीट ने निराश किया. इसके लिए बीजेपी के सीएम सहित कई बड़े नेताओं ने पूरी ताकत छोंक रखी थी. लेकिन उसे सफलता नहीं मिली. हालांकि, इसके पीछे विपक्ष का एकजुट होना भी बड़ा कारण कहा जा सकता है. Also Read - 28 साल के युवा को बीजेपी ने दिया टिकट, कांग्रेस के दिग्गज नेता को देंगे चुनौती

साल 2014 के आम चुनाव से ही एक तरह से देखा जाए तो देश में नरेंद्र मोदी की लहर है. पहले केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार और उसके बाद एक के बाद एक 21 राज्यों में बीजेपी की सरकार बनी. इन सभी चुनावों में मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी को शानदार सफलता मिली. लेकिन, दूसरी तरफ साल 2014 के बाद से हुए उपचुनावों में गुजरात की वड़ोदरा और मध्यप्रदेश की शहडोल लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव को छोड़ दें तो बीजेपी को हार का ही सामना करना पड़ा है. Also Read - रमज़ान में चुनाव पर आयोग ने कहा- खास दिनों का रखा है ख्याल, BJP बोली- धर्म पर सियासत न करें

इन सीटों पर मिली हार
साल 2014 में मैनपुरी और वड़ोदरा लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुए थे. इसमें मैनपुरी पर सपा और वड़ोदरा पर बीजेपी को जीत मिली. साल 2015 में प. बंगाल के बनगांव में तृणमूल और तेलंगाना के वारंगल में हुए लोकसभा उपचुनाव में टीआरएस को जीत मिली. साल 2016 में प बंगाल के तमलुक और कूच बेहर दोनों जगह तृणमूल को सफलता मिली. साल 2017 में पंजाब के गुरुदासपुर में जहां कांग्रेस वहीं श्रीनगर से नेशनल कॉन्फ्रेंस जीती.

साल 2018 और निराश करने वाला रहा
साल 2018 में लोकसभा उपचुनाव तो बीजेपी के लिए और चिंता लेकर आए. राजस्थान के अलवर और अजमेर दोनों सीटों पर बीजेपी अपनी सीट नहीं बचा पाई. इसके बाद प बंगाल के उलुबेरिया सीट को भी तमाम कोशिशों को बाद नहीं जीत पाई. अंत में बुधवार को यूपी के गोरखपुर और फूलपुर और बिहार की अररिया सीट पर भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा.

2019 में हो सकती है मुसीबत
ऐसे में देखा जाए तो यह बीजेपी के लिए चिंता की बात है. एक तरफ राज्यों में उसकी सरकार बनती जा रही है तो दूसरी तरफ उपचुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ रहा है. बीजेपी के लिए डर इस बात का है कि इस तरह का ग्राफ बना रहा तो साल 2019 के आम चुनाव में सत्ता विरोधी माहौल न बन जाए और उसकी स्थिति खराब हो जाए.