इलाहाबाद की आबोहवा में एकबार फिर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है।  यूपी चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी के रणनीतिक सूरमा संगमनगरी में अपना लंगर ड़ाल चुके है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गौरवगान भरे बैनर और पोस्टर से शहर पट चुका है। भाजपा की कार्यकारिणी बैठक की सारी तैयारियाँ लगभग पूरी की जा चुकी हैं लेकिन खबर है कि रविवार से इलाहाबाद में आयोजित इस बैठक में खलल पड़ सकता है। प्रतियोगी छात्र केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए भिड़ने के लिए तैयार हैं। यह भी पढ़ेंः यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का विचार मंथन कल से इलाहाबाद में शुरूAlso Read - UPPSC Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने कई विभागों में 972 पदों पर भर्ती को शुरू किए आवेदन

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प्रधानमंत्री की कोर टीम के काबिल सदस्य अपने चेहरे पर इलाहाबादी नकाब डाले हुए शहरवासियों के मिजाज को भापने में लगे है। जिससे 11 जून से 13 जून तक बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को सफल और मोदी के भाषण को सुपाच्य बनाया जा सके तथा किसी भी प्रकार की बदहजमी की संभावनाओ पर विराम लगाया जा सके। वही दूसरी तरफ इलाहाबाद के हजारों प्रतियोगी भी ‘दूध का जला मट्ठे को भी फुककर पीता है’ वाली कहावत को चरितार्थ मानकर दो साल पहले की तरह मोदी और राजनाथ को वाकओवर देने के मूड में बिल्कुल भी नहीं है। मुख्य प्रदर्शनकारियों में  प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति आगे है। Also Read - UPPSC Staff Nurse Admit Card 2021 Released: जारी हुआ UPPSC Staff Nurse 2021 का एडमिट कार्ड, इस Direct Link से करें डाउनलोड 

प्रतियोगी छात्रों द्वारा बनाया गया पोस्टर

प्रतियोगी छात्रों द्वारा बनाया गया पोस्टर

मोर्चे से जुड़े हुए प्रतियोगी छात्र अवनीश पाण्डेय ने हमें बताया कि चुनाव के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी आयोग के भ्रष्टाचार और अपने सीबीआई जांच के वादे की बात एक बार भी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की जबान पर नहीं आया। यह भी पढ़ेंः यूपी चुनाव में राजनाथ सिंह को सौंपी जाएगी भाजपा की कमान, जल्द होगा ऐलान

इन दो वर्षो के दौरान हजारों प्रतियोगी लोकसेवा आयोग को भ्रष्टाचार मुक्त करने की लड़ाई को सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ते रहे। इस दौरान उन्हे 48 बार पुलिस की बर्बरता का ना केवल शिकार होना पड़ा बल्कि प्रतियोगी छात्रों को पांच -पांच हजार का इनामिया बदमाश तक घोषित कर दिया गया।

अवनीश पांडेय ने अपने विरोध प्रदर्शन को सही ठहराते हुए तर्क रखे कि प्रदेश सरकार के इस दमनात्मक कार्यवाही के खिलाफ कोई एक्शन लेना तो दूर राजनाथ सिंह ने गृहमंत्री की हैसियत से एक बार भी इस संदर्भ में राज्य सरकार से जवाब मांगना भी उचित नहीं समझा। जिसको लेकर प्रतियोगीयों में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जबरदस्त असंतोष है और प्रतियोगी केंद्र सरकार और भाजपा से पुराना हिसाब चुकाने को बिल्कुल तैयार है। अब जबकि दो वर्ष बाद एक बार फिर राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री मोदी 2017 के मिशन की शुरुआत इलाहाबाद से करने जा रहे वही लाखो प्रतियोगियो इस मिशन को ध्वस्त कर इनके झूठे वादे का हिसाब चुकता करने की फिराक में है।

(नोटः यह खबर India.com के लिए स्वतंत्र  पत्रकार अंकित द्विवेदी ने लिखी है।)