नई दिल्ली: सत्तारूढ़ बीजेपी को पिछले वित्त वर्ष में अन्य राष्ट्रीय पार्टियों के मुकाबले 12 गुना ज्यादा यानि 437 करोड़ रुपए से अधिक राजनीतिक चंदा मिला. बुधवार को चुनाव से जुड़े एक विचार मंच द्वारा जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. बीजेपी और कांग्रेस को सबसे अधिक चंदा ”प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट” की ओर से मिला. एडीआर ने एक बयान में बताया, भाजपा ने अपने जिस चंदे की घोषणा की है, वह कांग्रेस, एनसीपी, भाकपा, माकपा और तृणमूल कांग्रेस द्वारा इसी अवधि में घोषित कुल चंदे से 12 गुना अधिक है. बयान में बताया गया है कि राष्ट्रीय दलों को करीब 90 फीसदी चंदा कॉर्पोरेट घरानों से और बाकी 10 फीसदी लोगों से मिला.

कॉर्पोरेट घरानों और कारोबारियों ने साल 2017.18 में भाजपा को 400.23 करोड़ रुपए राजनीतिक चंदे के रूप में दिए, जबकि कांग्रेस को केवल 19.29 करोड़ रुपया ही मिला.

प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट ने बीजेपी और कांग्रेस को मिलाकर कुल 164.30 करोड़ रुपए का चंदा दिया. इसमें से भाजपा को 154.30 करोड़ मिला, जो कि उसे मिले कुल चंदे का 35 फीसदी है. कांग्रेस के हिस्से में 10 करोड़ रुपया आया, जो कि उसे मिले कुल धन का 38 फीसदी है. दलों को मिले राजनीतिक चंदे में से दिल्ली से पार्टियों को 208. 56 करोड़ रुपया मिला तो वहीं, महाराष्ट्र से 71.93 करोड़ और गुजरात से 44.02 करोड़ रुपए मिले.

बता दें कि ‘प्रूडेंट इलैक्टोरल ट्रस्ट” बड़े कॉर्पोरेट घरानों द्वारा समर्थित कंपनी है,जिसमें परिसंपत्ति और टेलीकाम सेक्टर से जुड़ी बड़ी कंपनियां शामिल हैं. एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफोर्म्स (एडीआर) अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.

एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कुल चंदे में से 42.60 करोड़ रुपए यानि करीब 9.07 फीसदी राशि का अधूरी सूचना के कारण, पता नहीं चल सका कि यह किस राज्य से आया है.

राष्ट्रीय दलों द्वारा घोषित 20 हजार रुपए से अधिक के चंदे में वर्ष 2017.18 के लिए राष्ट्रीय दलों ने 469.89 करोड़ रुपएपया मिलने की घोषणा की है. इसमें से ज्यादातर हिस्सा 437.04 करोड़ रुपए भाजपा के खाते में गया, जबकि कांग्रेस को 26.65 करोड़ रुपए मिले.

इस बीच, बहुजन समाज पार्टी ने ऐलान किया है कि इस अवधि में उसे 20 हजार रुपए से अधिक कोई चंदा नहीं मिला. बसपा पिछले 12 साल से हर साल यही घोषणा करती आ रही है. दिल्ली स्थित विचार मंच ने यह जानकारी दी है.