नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जीत को लेकर भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से आश्वस्त है. भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि पार्टी इस बार पश्चिम बंगाल की सत्ता हासिल कर ही दम लेगी. इसके लिए पार्टी ने बहुत आक्रामक रणनीति तैयार की है. Also Read - जम्मू-कश्मीर में नेताओं पर बढ़े हमले पाकिस्तान की हताशा: भाजपा

भाजपा के शीर्षस्तरीय सूत्रों ने यह भी संकेत दिए हैं कि राज्य में बगैर किसी स्थानीय चेहरे के पार्टी चुनाव मैदान में उतर सकती है. चेहरे के सवाल पर पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2018 में त्रिपुरा में भी किसी स्थानीय नेता को चेहरा घोषित किए बगैर पार्टी ने चुनाव लड़कर सफलता हासिल कर सरकार भी बनाई थी. Also Read - 'जस्टिस फॉर सुशांत' का बिहार चुनाव पर होगा असर, जानें राजपूत समुदाय से कैसे होगा पार्टियों को फायदा

ऐसे में अगर पश्चिम बंगाल में पार्टी कोई चेहरा नहीं घोषित करती है तो इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में स्थानीय मुद्दों और मोदी के चेहरे पर ही चुनाव मैदान में उतरने से पार्टी को फायदा पहुंचेगा. साल के आखिर में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी आक्रामक रूप से तैयारियों में जुटी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव पिछले एक सप्ताह से बिहार में कैंप कर लगातार बैठकें कर रहे हैं. Also Read - श्रीनगर में भाजपा नेता पर आतंकियों ने फिर चलाई गोली, गंभीर हालत में अस्पताल में चल रहा है इलाज

पार्टी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि बिहार में एनडीए एकजुट है. जदयू और लोक जनशक्ति पार्टी से जल्द ही सीटों के बंटवारे पर सहमति हासिल कर ली जाएगी. हालांकि, अभी भाजपा नेतृत्व यह तय नहीं कर पाया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर 50-50 के अनुपात में जदयू से सीटों का बंटवारा होगा या फिर 2010 का फॉर्मूला अपनाया जाएगा. 2010 में बीजेपी और जदयू ने साथ-साथ चुनाव लड़ा था. तब बंटवारे के दौरान जदयू को जहां 141 सीटें मिली थीं, वहीं बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़ा था.