नई दिल्लीः माकपा ने नागरिकता (संशोधन) विधेयक का रविवार को विरोध करते हुए कहा कि सरकार इसके जरिए मोहम्मद अली जिन्ना के ‘‘द्विराष्ट्र के सिद्धांत’’ को लागू कर रही है. पार्टी ने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान जैसा नहीं बनना चाहिए. इस विधेयक के सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है.

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भारत के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के दर्शन में यकीन रखने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी संसद में इस प्रस्तावित विधेयक को पेश किए जाने पर इसमें दो संशोधन का सुझाव देगी. येचुरी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि पार्टी दो संशोधन का सुझाव देकर उन सभी शर्तों को हटाने की मांग करेगी, जो धर्म को नागरिकता प्रदान करने का आधार बनाते हैं.

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येचुरी ने कहा, ‘‘इस तरह की संकीर्ण और अंध सांप्रदायिकता की इजाजत नहीं दी जा सकती.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम धर्म के आधार पर, वह भी तीन देशों के लोगों को नागरिकता देने वाले नागरिकता (संशोधन) विधेयक का पुरजोर विरोध करते हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत समान रूप से सभी धर्मों का घर है और सभी धर्मों के लोगों के साथ अवश्य ही समान व्यवहार होना चाहिए.

येचुरी के साथ संवाददाता सम्मेलन में मौजूद पार्टी के एक अन्य नेता मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि वह विधेयक में धर्म के आधार पर नागरिकता दिए जाने से स्तब्ध हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह विधेयक कमोबेश पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना के द्विराष्ट्र के सिद्धांत पर आधारित है जिसे भाजपा प्रभावी रूप से लागू कर रही है. भारत को पाकिस्तान के रास्ते नहीं चलना चाहिए.’’