नई दिल्लीः राजनीतिक रूप से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा ने आगामी लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है. भाजपा और संघ परिवार ने राज्य की सभी 80 सीटों के लिए बेहद खास प्लान बनाया है. पार्टी राज्य में संभावित सपा-बसपा गठबंधन के ‘खतरों’ के मद्देनजर इस प्लान पर पिछले कई महीनों से काम कर रही है. पहले चरण में पार्टी नेताओं और संघ के कार्यकर्ताओं को सभी 80 सीटों पर जमीनी स्तर पर तैनात किया गया है जो यह पता कर रहे हैं कि हर निर्वाचन क्षेत्र में जनता के बीच किस चीज को मुद्दा बनाया जा सकता है.

इस क्रम में पार्टी ने गुजरात के पूर्व गृह मंत्री गोवर्धन झड़ापिया (Govardhan Jhadapia) को बुधवार को राज्य का प्रभारी नियुक्त किया. इनकी नियुक्ति का मुख्य मकसद पार्टी के भीतर गुटबाजी को खत्म करना और क्षमतावान नेताओं का भरपूर लाभ उठाना है. झड़ापिया चुनाव से पहले उन नेताओं को भी साधने की कोशिश करेंगे, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रभाव में दरकिनार हो गए हैं.

संघ प्रहरी बना रहे हैं रिपोर्ट
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने राज्य की 80 में 73 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस तरह देखा जाए तो राज्य में पार्टी के पास इससे बेहतर प्रदर्शन की गुंजाइश नहीं है. ऐसे में उसकी रणनीति सपा-बसपा के संभावित गठजोड़ से होने वाले नुकसान को कम से कम करना है. इसी कारण संघ और वीएचपी चुनाव से ऐन पहले न केवल राम मंदिर का राग अलाप रहे हैं बल्कि वे जमीनी स्तर पर भी इस दिशा में काम कर रहे हैं.

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भाजपा द्वारा जीती गईं सभी 71 सीटों पर संघ प्रहरियों की नियुक्ति की गई है. ये प्रहरी स्थानीय सांसद के प्रदर्शन को लेकर जनता से फीडबैक ले रहे हैं और इस आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में इनके जीतने की कितनी संभावना है. टिकट बंटवारे में उनके इस फीडबैक की अहम भूमिका होगी. संघ के संयुक्त सचिव कृष्ण गोपाल इस पूरी कवायद पर नजर रख रहे हैं. आगामी चुनाव में उनकी राय कई सांसदों के भविष्य तय करेंगे. संघ, भाजपा को यह भी बता रहा है कि कौन मुद्दा अहम और कहां पार्टी पीछे रह रही है.

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वाराणसी पर फोकस
इतना ही नहीं वाराणसी को लेकर भाजपा और संघ परिवार सचेत हैं. वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी राज्य में बेहद लोकप्रिय हैं, फिर भी वह कोई जोखिन नहीं उठाना चाहती. पार्टी ने अपने कई बड़े नेताओं को वाराणसी में लगाया है. गुजरात के नवसारी के सांसद सीआर पाटिल परियोजनाओं की देखरेख के लिए अक्सर शनिवार-रविवार को शहर में होते हैं. वाराणसी के पास गाजीपुर से सांसद मनोज सिंह भी यहां के कामकाम की देखरेख में शामिल रहते हैं. प्रदेश भाजपाध्यक्ष और चंदौली से सांसद महेंद्रनाथ पांडे भी यहां अक्सर देखे जाते हैं.

2014 के आम चुनाव में झड़ापिया ने वाराणसी में काम किया था. इसके बाद वह राज्य में किसानों और पिछड़े वर्ग के बीच काम किया. इसके अलावा यूपी के नए सह चुनाव प्रभारी दुश्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा का चयन भी खास मकसद से किया गया. गौतम दलित समुदाय के बीच काम करेंगे तो मिश्रा को बुंदेलखंड क्षेत्र की जिम्मेवारी दी गई है. वहां पर उच्च जाति वर्ग के लोगों की संख्या ठीक-ठाक है.