नई दिल्लीः भारतीय जनता पार्टी और जनता दल सेक्युलर जेडीएस ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को उनके ही जिले में मात देने के लिए हाथ मिलाया है. दोनों पार्टियों ने न केवल चामुंडेश्वरी बल्कि मैसूर जिले के हर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को रोकने के लिए साथ आने का फैसला किया है. दोनों पार्टियां मैसूर जिले में कांग्रेस को हराने के लिए एक दूसरे की मदद कर रही हैं. इस समय मैसूर की 11 सीटों में से 8 पर कांग्रेस का कब्जा है. जेडीएस ने 2013 में तीन सीटें जीती थीं. वहीं बीजेपी को इस जिले में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी. भले ही बीजेपी को यहां एक भी सीट नहीं मिली हो लेकिन पार्टी की उपस्थिति को नहीं नकार सकते.

कई सीटों पर कांग्रेस का जेडीएस से मुकाबला
मैसूर जिले की सीटों पर कहीं बीजेपी ने तो कहीं जेडीएस ने एक दूसरे को जीताने के लिए उम्मीदवार बदला है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चामुंडेश्वरी से भी चुनाव लड़ रहे हैं. यहां बीजेपी ने पहले किसी और को टिकट दिया था लेकिन बाद में उम्मीदवार बदल दिया. यहां गोपाल राव बीजेपी की तरफ से मैदान में हैं. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी यहां से जेडीएस के उम्मीदवार को जीताना चाहती है. वहीं बीजेपी ने जेडीएस के सपोर्ट के लिए केआर नगर सीट पर भी अपना उम्मीदवार बदला है. यहां कांग्रेस और जेडीएस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है.

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दोनों पार्टियों ने बदले उम्मीदवार
पेरियापटना सीट से बीजेपी पहले गणेश को टिकट देना चाहती थी जिन्हें पिछले चुनाव में 28 हजार वोट मिले थे. लेकिन अब जेडीएस के समर्थन के लिए एस मंजूनाथ को खड़ा किया है. कुरुबा वोट काटने के लिए बीजेपी ने मंजूनाथ को टिकट दिया है. यहां कुरु वंश और वोक्कालिगा का प्रभाव है. यही रणनीति मैसूर जिले के हंसूर, एचडी कोट और चामाराजा के लिए अपनाई है. बीजेपी ने यहां भी कमजोर कैंडिडेट खड़े किए हैं जिससे जेडीएस को फायदा मिले. कृष्णराजा सीट से बीजेपी को जीताने के लिए जेडीएस मदद कर रही है. बीजेपी ने यहां एस ए रामदास को मैदान में उतारा है. यह सीट इस समय कांग्रेस के पास है. एम के सोमशंकर विधायक हैं.

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ओपिनियन पोल में हंग असेंबली
गौरतलब है कि टाइम्स नाऊ और वीएमआर के ओपिनियन पोल में कर्नाटक में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिल रहा है. वहीं जेडीएस किंगमेकर के तौर पर उभर रही है. ओपिनियन पोल के मुताबिक, 224 विधानसभा सीटों वाले चुनाव में कांग्रेस को 91 सीटें मिलती दिख रही हैं. वहीं, बीजेपी को 89 सीटें मिलती दिख रही हैं. दोनों ही पार्टियां सरकार बनाने के लिए जरूरी 113 का आंकड़ा छूती नजर नहीं आ रही हैं. वहीं, जेडीएस 40 सीट के साथ किंगमेकर की भूमिका में दिख रही है. सर्वे के मुताबिक, कांग्रेस को 31 सीट का नुकसान हो रहा है, जबकि बीजेपी को 49 सीट का फायदा हो रहा है.

वोट शेयर की बात करें तो कांग्रेस का वोट शेयर 36.6% से 38.6% तक बढ़ सकता है. दूसरी तरफ बीजेपी 15% में 20% वोट शेयर और जोड़ सकती है. बीजेपी को कर्नाटक जनता पार्टी (केजेपी) और बीएसआर कांग्रेस से गठबंधन का फायदा मिलता दिख रहा है. ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की वजह से कांग्रेस की सीटों की संख्या बढ़ सकती है.