हैदराबाद. बीजेपी महासचिव राम माधव ने असम के एनआरसी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होगा और संबंधित लोगों को अपनी नागरिकता सिद्ध करने के पर्याप्त अवसर दिए जाएंगे. उन्होंने दावा कि किसी भी सांप्रदायिक समूह को परेशान करने, किसी के खिलाफ किसी भी विरोधाभास के साथ यह प्रयास नहीं किए जा रहे.

उन्होंने कहा, ‘‘असम और राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में हम कड़े निर्णय लेने को तैयार हैं. लेकिन किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा. माधव ने कहा कि पीड़ित लोगों के पास ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय जाने का विकल्प भी मौजूद है.

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि वह असम में हाल ही में प्रकाशित राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में शामिल किये गये व्यक्तियों में से दस फीसदी के पुन:सत्यापन पर विचार कर सकता है. शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को ‘‘बड़ी मानव समस्या’’ करार दिया और राज्य एनआरसी समन्वयक से दावाकर्ताओं को पैतृक दस्तावेजों के नये सेट दायर करने की अनुमति देने के प्रभाव पर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने से कहा.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन की पीठ ने कहा कि प्रकाशित मसौदे में शामिल व्यक्तियों का पुन:सत्यापन ‘‘नमूना सर्वेक्षण’’ जैसा होगा जो पास के जिलों के एनआरसी सेवा केन्द्रों के अधिकारियों के एक दल द्वारा किया जा सकता है.