भोपाल: इन्दौर नगर निगम के एक अधिकारी की क्रिकेट बैट से पिटायी के मामले में गिरफ्तार हुए भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय (34) को भोपाल की विशेष अदालत से शनिवार को जमानत मिल गई. इसके अलावा, अदालत ने उन्हें बिना अनुमति का प्रदर्शन करने के एक अन्य मामले में भी जमानत दे दी. आकाश भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं और नवम्बर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में इन्दौर-3 विधानसभा सीट से जीतकर पहली बार विधायक बने हैं. Also Read - MP: भोपाल की छात्रा की रहस्यमयी मौत का मामला, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

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जिला लोक अभियोजक अधिकारी राजेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि भोपाल की विशेष अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह ने आकाश विजयवर्गीय की जमानत याचिका पर आज सुनवाई करने के बाद दोनों मामलों में उन्हें जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए. उन्होंने कहा कि इन्दौर नगर निगम के अधिकारी की क्रिकेट बैट से पिटायी के मामले में उन्हें 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत मिली हैं, जबकि बिना अनुमति के प्रदर्शन करने के एक अन्य मामले में 20,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई. वहीं, आकाश विजयवर्गीय के वकील पुष्यमित्र भार्गव ने आकाश को जमानत मिलने के बाद यहां संवाददाताओं को बताया कि मुझे उम्मीद है कि रविवार तक आकाश जेल से रिहा हो जाएंगे. Also Read - कोलकाता: कैलाश विजयवर्गीय के खिलाफ भाजपा कार्यालय के बाहर लगे ‘वापस जाओ’ के पोस्टर, मचा बवाल

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भार्गव ने कहा कि अपने मुवक्किल को जमानत पर रिहा करने की मांग करते हुए हमने वर्ष 2014 के अरनेश कुमार बनाम बिहार सरकार के मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए अदालत से कहा कि जिन अपराधों में सात वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है, उनमें पुलिस थाने से ही जमानत हो जाती है. लेकिन उन्हें अदालत की बजाय इन्दौर के एक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) के समक्ष पेश किया गया था, जो गलत था. उन्होंने बताया कि हमने दलील दी कि आकाश विजयवर्गीय निर्दोष हैं. पुलिस ने उनकी छवि खराब करने के लिए आकाश को झूठा फंसाया है और उनका (भाजपा विधायक का) अपराधों से कोई लेना-देना नहीं है. वहीं, जमानत याचिका का विरोध करते हुए जिला लोक अभियोजक अधिकारी राजेन्द्र उपाध्याय ने दलील दी कि विधायक ने सोची समझी रणनीति के तहत यह कृत्य किया है.

उन्होंने कहा कि आकाश ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई है. वह लोकसेवक हैं. उन्हें जनता ने कानून बनाने के लिए चुना है, न कि कानून तोड़ने के लिए. उन्होंने सार्वजनिक स्थान पर अधिकारी के साथ मारपीट की है. यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो इससे समाज एवं देश में गलत संदेश जाएगा. इससे पहले इन्दौर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आकाश विजयवर्गीय की जमानत याचिका गुरुवार को खारिज कर दी थी तथा उन्हें सलाह दी थी कि इस हेतु वह प्रदेश के सांसदों और विधायकों के मामलों की सुनवाई के लिये निर्धारित की गई भोपाल की विशेष अदालत में अपील करें. इसके अगले ही दिन शुक्रवार को आकाश के वकीलों ने उनकी जमानत के लिये भोपाल की विशेष अदालत का रुख किया. उच्चतम न्यायालय के आदेश पर विभिन्न प्रदशों में सांसदों और विधायकों के मामलों पर त्वरित सुनवाई के लिये विशेष अदालतों का गठन किया गया है.

क्रिकेट बैट से नगर निगम अधिकारियों की पिटाई में बीजेपी एमएलए आकाश विजयवर्गीय अरेस्‍ट

भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय इन्दौर में नगर निगम के एक भवन निरीक्षक को क्रिकेट बैट से कथित रूप से पीटते कैमरे में कैद हुए थे. उक्त घटना जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के दौरान विवाद के बाद हुई थी. पुलिस ने गिरफ्तारी के बाद आकाश को बुधवार को इन्दौर के एक प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) के समक्ष पेश किया गया था. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भाजपा विधायक की जमानत याचिका खारिज कर दी और उन्हें 11 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.

इसके बाद पुलिस द्वारा न्यायिक हिरासत के तहत इन्दौर की जेल में बंद भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का पुतला जलाने के पुराने मामले में बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया. एमजी रोड थाने के प्रभारी राजेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि पुलिस की टीम आजाद नगर स्थित जिला जेल गयी थी और वहां बंद भाजपा विधायक को भारतीय दण्ड विधान की धारा 188 के तहत कुछ दिन पहले दर्ज मामले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया.