इंदौर: इंदौर नगर निगम के अधिकारी को क्रिकेट बल्ले से पीटने के बहुचर्चित मामले और एक अन्य प्रकरण में जमानत मिलने पर रविवार सुबह जिला कारागार से छूटने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि जेल जाने का उनका पहला अनुभव अच्छा रहा. भाजपा विधायक ने कहा, “मैं अपने जीवन में पहली बार जेल गया था, लेकिन जेल में रहने का अनुभव अच्छा रहा. जेल के अंदर मेरा समय बहुत अच्छा बीता. हालांकि, जेल से बाहर आकर मुझे खुशी है क्योंकि मुझे जनता के लिये अपने अधूरे काम को आगे बढ़ाना है.” Also Read - दो होटलों में चल रहा था Sex Racket, पुलिसकर्मी 'ग्राहक' बनें तो 5 युवतियों समेत 12 आए शिकंजे में

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अफसर को बल्ले से पीटकर भी ‘हीरो’ बन गए बीजेपी MLA, जेल में चार रातें गुजार बाहर आने पर हो रहा स्वागत Also Read - एमपी में बर्ड फ्लू की हुई पुष्टि, राज्‍य के कई जिलों में कौवों की मौत के बाद सरकार ने जारी क‍िया था अलर्ट

आकाश (34) भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे हैं. शहर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के विरोध के दौरान बुधवार को बड़े विवाद के बाद भाजपा विधायक ने नगर निगम के एक भवन निरीक्षक को क्रिकेट के बल्ले से पीट दिया था. अधिकारियों ने बताया कि इस विवादग्रस्त मकान को नगर निगम जल्द ही ढहाने की तैयारी कर रहा है, क्योंकि बारिश के मौसम में यह बरसों पुरानी इमारत जान-माल के लिये खतरनाक साबित हो सकती है. इस बारे में पूछे जाने पर भाजपा विधायक ने कहा, “मुझे इस सिलसिले में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है. मैं इस बारे में पता लगाता हूं. हालांकि, मैं आगे भी जनता के मुद्दों के लिये संघर्ष करता रहूंगा.”

भोपाल की एक विशेष अदालत ने बल्ला कांड और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का पुतला फूंकने के अलग-अलग मामलों में विजयवर्गीय की जमानत अर्जी शनिवार शाम मंजूर की थी. जिला जेल की अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने बताया, “हमें विजयवर्गीय को जमानत पर रिहा करने का अदालती आदेश शनिवार रात 11 बजे के आस-पास मिला. तय औपचारिकताएं पूरी कर उन्हें रविवार सुबह जेल से छोड़ दिया गया.”

बता दें कि विधायक आकाश विजयवर्गीय ने अफसर को सरेआम बल्ले से मारने वाली जैसी घटना को अंजाम दिया, इसके बाद आज वह जेल से छूटे तो उनका किसी हीरो की तरह स्वागत किया जा रहा है. उनके समर्थन में इंदौर में बैनर पोस्टर लगा दिए गए थे. चार दिन बाद उन्हें बेल मिली तब वह जेल से बाहर आए.